स्वच्छ जल पाना बुनियादी अधिकार, उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में पानी की किल्लत पर जताई चिंता
स्वच्छ जल पाना बुनियादी अधिकार, उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में पानी की किल्लत पर जताई चिंता
मुंबई, 22 जून (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में पानी की कमी पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि स्वच्छ एवं पीने लायक पानी हासिल करना एक बुनियादी अधिकार है।
अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि यह समस्या कब तक हल होगी।
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ विदर्भ इलाके के अमरावती जिले के आदिवासी मेलघाट क्षेत्र में कुपोषण के कारण शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की मौत के मामलों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
अदालत को बताया गया कि गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ-साथ, यह इलाका स्वच्छ पानी की कमी से बुरी तरह प्रभावित है।
अप्रैल में हुई पिछली सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि दूषित पानी पीने से इलाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी।
सरकार ने सोमवार को पीठ को बताया कि पेयजल के टैंकर समय-समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आपूर्ति अनियमित है।
इसके बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि पानी के टैंकर उपलब्ध कराकर सरकार कोई ‘‘एहसान’’ नहीं कर रही है।
अदालत ने कहा, ‘स्वच्छ और पीने लायक पानी हासिल करना संविधान में दिया गया एक मौलिक अधिकार है और सरकार का फर्ज है कि वह अपने सभी नागरिकों को यह सुविधा उपलब्ध कराये। सिर्फ मेलघाट इलाका ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य पानी की कमी की समस्या से जूझ रहा है।’’
पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह बताए कि यह समस्या कब तक हल हो जाएगी और इस पर क्या कदम उठाए गए हैं।
साथ ही, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए मंगलवार की तारीख तय की।
भाषा सुरेश अविनाश
अविनाश

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