सत्याग्रह में संघ के स्वयंसेवकों की जबर्दस्त भागीदारी के कारण आपातकाल खत्म करना पड़ा था: रामलाल

सत्याग्रह में संघ के स्वयंसेवकों की जबर्दस्त भागीदारी के कारण आपातकाल खत्म करना पड़ा था: रामलाल

सत्याग्रह में संघ के स्वयंसेवकों की जबर्दस्त भागीदारी के कारण आपातकाल खत्म करना पड़ा था: रामलाल
Modified Date: May 23, 2026 / 10:35 pm IST
Published Date: May 23, 2026 10:35 pm IST

मुंबई, 23 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता रामलाल ने शनिवार को दावा किया कि अगर संघ के स्वयंसेवकों ने आपातकाल के खिलाफ ‘सत्याग्रह’ में बड़ी संख्या में भाग नहीं लिया होता, तो इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1977 में आम चुनाव नहीं कराए होते।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल यहां संघ के कोंकण संभाग की बैठक के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि आपातकाल के दौरान आरएसएस के स्वयंसेवकों ने इतनी बड़ी संख्या में सत्याग्रह में भाग न लिया होता और जेलों को न भरा होता, तो सरकार आम चुनाव की घोषणा न करती और जनता पार्टी सत्ता में न आती। आपातकाल जारी रहता और भारत में लंबे समय तक तानाशाही शासन जारी रहता।’’

रामलाल ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान जेल में बंद किए गए लोगों में से लगभग 80 प्रतिशत संघ के स्वयंसेवक थे। उन्होंने यह भी बताया कि उस दौरान उन्होंने खुद आठ महीने जेल में बिताए थे।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा घोषित आपातकाल 1975 से 1977 तक 21 महीनों तक चला था। इसके बाद हुए चुनाव में विपक्षी जनता पार्टी सत्ता में आई।

आरएसएस के योगदान के बारे में चर्चा जारी रखते हुए रामलाल ने कहा, ‘‘भारत ने जितने भी युद्ध लड़े, उन सभी में आरएसएस के स्वयंसेवक भारतीय सेना के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे।’’

एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि विमान से गिराई गई सैन्य सामग्री एक खतरनाक क्षेत्र में गिरी थी।

उन्होंने कहा, “जवानों पर दुश्मन का ध्यान जा सकता था। किसी ने उन्हें बताया कि पास में ही एक गांव है, जहां आरएसएस के स्वयंसेवक हर शाम इकट्ठा होते हैं। स्वयंसेवक रेंगते हुए उस जगह तक पहुंचे जहां सामग्री गिरी थी और उसे वापस ले आए। उनके नाम कभी सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन इस कार्रवाई में चार लोग शहीद हो गए।’’

संघ के सपर्क प्रमुख ने यह भी बताया कि स्वयंसेवकों ने संकट के समय नागरिक प्रशासन की सहायता भी की, जिसमें 1965 के युद्ध के दौरान दिल्ली में यातायात व्यवस्था संभालना भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘24 घंटे के प्रशिक्षण के साथ स्वयंसेवकों ने दिल्ली के यातायात को इतनी कुशलता से संभाला कि उस दौरान दुर्घटनाओं की संख्या सबसे कम रही।’’

उन्होंने कहा कि 1962 के युद्ध के बाद कम समय की सूचना पर लगभग 3,000 स्वयंसेवकों ने 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया था।

संघ के जनसंपर्क प्रयासों का जिक्र करते हुए रामलाल ने कहा कि वह आरएसएस के विरोधियों से भी बातचीत करते हैं।

उन्होंने दावा किया, ‘‘जब हम सार्वजनिक रूप से हमारा विरोध करने वाले विभिन्न प्रकार के लोगों से मिलते हैं, तो वे स्वीकार करते हैं कि आरएसएस के स्वयंसेवक देशभक्त, अनुशासित होते हैं एवं सामाजिक कार्य करते हैं। कभी-कभी हम उनसे सार्वजनिक रूप से ऐसा कहने का अनुरोध करते हैं, लेकिन कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि कहते हैं कि उन्हें ऐसा करने में कठिनाई होती है।’’

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप


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