मुंबई में परिवार की मौत: एफडीए को संदिग्ध तरबूज के नमूने लेने के लिए क्षेत्र में विक्रेता नहीं मिला

मुंबई में परिवार की मौत: एफडीए को संदिग्ध तरबूज के नमूने लेने के लिए क्षेत्र में विक्रेता नहीं मिला

मुंबई में परिवार की मौत: एफडीए को संदिग्ध तरबूज के नमूने लेने के लिए क्षेत्र में विक्रेता नहीं मिला
Modified Date: April 30, 2026 / 10:11 pm IST
Published Date: April 30, 2026 10:11 pm IST

मुंबई, 30 अप्रैल (भाषा) दक्षिण मुंबई के जेजे मार्ग इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के कारणों की जांच कर रही खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीम अभी तक आसपास के किसी भी तरबूज विक्रेता से नमूने नहीं ले पाई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में तरबूज की कोई भूमिका थी। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

मुंबई के इस्माइल कुर्ते रोड स्थित घारी मोहल्ला निवासी दोकाडिया परिवार के घर 25 अप्रैल की रात को निजी कार्यक्रम में कुछ रिश्तेदार जुटे थे। रात करीब एक बजे, मेहमानों के जाने के घंटों बाद, अब्दुल्ला दोकाडिया (40), उनकी पत्नी नसरीन (35), और बेटियां आयशा (16) और ज़ैनब (13) तरबूज खाए थे।

अगली सुबह तड़के उन्हें उल्टी और दस्त की गंभीर समस्या हुई और तत्काल उन्हें एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें सरकारी जे जे अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान चारों की मौत हो गई।

अधिकारी ने बताया, ‘‘एफडीए की टीम ने दोकाडिया के घर जाकर चिकन पुलाव और तरबूज के नमूने एकत्र किए। दो दिन बाद बचे हुए चिकन पुलाव में फफूंद लग गई थी। टीम ने तरबूज विक्रेताओं से भी संपर्क करके संदिग्ध तरबूज की खेपों की जांच करने की कोशिश की।’’

उन्होंने बताया, लेकिन पिछले दो दिनों से इलाके में कोई विक्रेता नहीं मिला, जिससे एफडीए टीम को नमूने प्राप्त करने में बाधा आ रही है।

अधिकारी ने बताया कि एफडीए ने फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) से उनके द्वारा एकत्र किए गए खाद्य नमूनों पर रिपोर्ट साझा करने का अनुरोध किया है।

मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुलिस इस मामले में एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, और फल में विषाक्त पदार्थों आदि की मौजूदगी से संबंधित सवालों के जवाब तभी दिए जा सकेंगे।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला तो नहीं है। उन्होंने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि क्या दोकाडिया परिवार कर्ज में डूबा हुआ था या किसी मुद्दे को लेकर परेशान था।

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश


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