पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने राकांपा छोड़ी, एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में हुए शामिल

पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने राकांपा छोड़ी, एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में हुए शामिल

पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने राकांपा छोड़ी, एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में हुए शामिल
Modified Date: May 15, 2026 / 01:05 am IST
Published Date: May 15, 2026 1:05 am IST

मुंबई, 14 मई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले से लोकसभा के सदस्य रहे आनंद परांजपे बृहस्पतिवार को उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवेसना में शामिल हो गये।

राकांपा और शिवसेना दोनों ही भाजपा के साथ महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा हैं।

आनंद परांजपे ने ‘बालासाहेब भवन’ में शिवसेना संसदीय दल के नेता श्रीकांत शिंदे और राज्य मंत्रियों दादाजी भूसे और उदय सामंत की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुए।

चौदह साल के अंतराल के बाद पार्टी में लौटने पर आनंद परांजपे का स्वागत करते हुए श्रीकांत शिंदे ने उनके और शिंदे परिवारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “आनंद परांजपे और शिंदे परिवार के बीच शिवसेना में उनके पूर्व कार्यकाल से ही घनिष्ठ संबंध रहे हैं। यहां तक ​​कि राकांपा में रहते हुए भी उन्होंने बिना किसी अपेक्षा के अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।”

आनंद परांजपे ने कहा कि उनका यह निर्णय अपनेपन की भावना और उपमुख्यमंत्री शिंदे के शासन के प्रति प्रशंसा से प्रेरित था। उन्होंने कहा, “मैं दूसरे दल में था लेकिन मेरा डीएनए शिवसेना में बना हुआ है।’’

इससे पहले दिन में परांजपे ने राकांपा प्रमुख को भेजे त्यागपत्र में कहा कि वह पार्टी महासचिव, प्रवक्ता तथा ठाणे एवं पालघर जिलों के समन्वयक का पद छोड़ रहे हैं।

परांजपे ने पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का 14 वर्षों तक के जुड़ाव के लिए आभार व्यक्त किया था।

उन्होंने कहा था, ‘‘नई यात्रा शुरू करने के लिए मैं भारी मन से राकांपा से अपना नाता तोड़ रहा हूं।’’

वरिष्ठ शिवसेना नेता स्वर्गीय प्रकाश परांजपे के पुत्र आनंद परांजपे ने 2012 में शिवसेना छोड़ दी थी और राकांपा में शामिल हो गए थे। जुलाई 2023 में जब अजित पवार राकांपा में विभाजन कर महायुति सरकार में शामिल हो गये थे तब आनंद परांजपे उनके (अजित पवार वाले गुट के) साथ चले गये।

आनंद परांजपे दो बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने 2009 में शिवसेना के टिकट पर कल्याण लोकसभा सीट जीती थी। वह 2012 में शिवसेना छोड़कर राकांपा में चले गये थे। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में वह कल्याण से अविभाजित शिवसेना के श्रीकांत शिंदे से हार गए थे।

भाषा

राजकुमार प्रशांत

प्रशांत


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