मुंबई में वायु प्रदूषण पर उच्च न्यायालय सख्त, उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी

मुंबई में वायु प्रदूषण पर उच्च न्यायालय सख्त, उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी

मुंबई में वायु प्रदूषण पर उच्च न्यायालय सख्त, उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी
Modified Date: January 29, 2026 / 09:07 pm IST
Published Date: January 29, 2026 9:07 pm IST

मुंबई, 29 जनवरी (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि मुंबई और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं। इसके साथ ही अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला किया है।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अगुवाई वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी की आलोचना नहीं कर रही है, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ‘लोगों को शुद्ध हवा में जीने का अधिकार मिले।’

अदालत ने अक्टूबर 2023 में मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर स्वतः संज्ञान लिया था।

इसके बाद छह नवंबर 2023 को अदालत ने अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक उपायों को लेकर निर्देश और सुझाव जारी किए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि इसके बावजूद मुंबई और नवी मुंबई की नगरपालिकाओं द्वारा उठाए गए कदमों से वह संतुष्ट नहीं है।

पीठ ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह ‘सिर्फ अपने हलफनामों के सहारे आगे बढ़ रहा है’ और उसके द्वारा बताए गए कदम प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।

अदालत ने कहा कि मुंबई में वायु प्रदूषण कम नहीं हुआ है, बल्कि दिसंबर महीने में स्थिति ‘बहुत गंभीर’ बताई गई थी।

अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित प्राधिकरणों ने शायद गंभीर प्रयास किए हों, लेकिन उनके परिणाम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं।

उच्च न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि बढ़ते मामलों और सीमित समय के चलते वह नगरपालिकाओं, एमपीसीबी और 2023 में गठित विशेषज्ञ समिति की सभी रिपोर्ट और हलफनामों की गहन जांच नहीं कर पा रही है।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला किया कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी के लिए उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति रोजाना बैठक करेगी और इसके सदस्यों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

अदालत ने यह सुझाव भी नोट किया कि वायु प्रदूषण से प्रभावित नागरिकों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।

नवी मुंबई नगर निगम के वकील ने दलील दी कि इस विषय से निपटने के लिए पहले से ही वैधानिक निकाय मौजूद हैं। इस पर अदालत ने कहा कि उसे मौजूदा कार्यवाही में ऐसे किसी निकाय की प्रभावी भूमिका या ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है और इसलिए वह समिति को ‘कुछ अधिकार’ देने के पक्ष में है।

अदालत ने कहा कि वह लिखित आदेश में समिति के सदस्यों के नामों को अंतिम रूप देगी।

भाषा

राखी सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में