यदि गलती का पछतावा है तो उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना में लौट आएं: संजय राउत

यदि गलती का पछतावा है तो उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना में लौट आएं: संजय राउत

यदि गलती का पछतावा है तो उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना में लौट आएं: संजय राउत
Modified Date: June 2, 2026 / 03:06 pm IST
Published Date: June 2, 2026 3:06 pm IST

नासिक, दो जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने मंगलवार को कहा कि 2022 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ गए नेताओं को यदि अपनी ‘‘गलती’’ का पछतावा है तो उन्हें उद्धव ठाकरे नीत पार्टी में वापस लौट आना चाहिए।

राउत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि, कुछ लोगों को पार्टी में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा। राउत ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यदि किसी को अपनी गलती पर पछतावा है…भाजपा जिस तरह उनका अपमान कर रही है, उससे उन्हें लग रहा है कि उन्होंने गलत फैसला लिया था तो उन्हें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी में वापस आ जाना चाहिए।’’

राउत की यह टिप्पणी राज्य के पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा ने ‘‘शिवसेना (उबाठा) के हाथ-पैर काट दिए, उसने छत्रपति संभाजीनगर जिले में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का सिर ही काट दिया।’’

सत्तार ने यह भी कहा था कि यदि ‘‘बड़ा भाई ही हमें खत्म करने पर तुला हो’’ तो शिवसेना-भाजपा गठबंधन का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इस सवाल पर कि क्या दोनों शिवसेना दलों को फिर से एकसाथ आ जाना चाहिए, उन्होंने हां में जवाब दिया था।

राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में मूल गठबंधन में भाजपा कभी ‘‘बड़ा भाई’’ नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि अविभाजित शिवसेना ही गठबंधन की सबसे बड़ी साझेदार थी और भाजपा इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकी, इसलिए उसने पार्टी को तोड़ दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना कोई वास्तविक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि उसका अस्तित्व निर्वाचन आयोग की ‘‘भ्रष्ट प्रक्रियाओं’’ का परिणाम है।

राउत ने कहा कि शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी कानूनी मुद्दे पर जब भी उच्चतम न्यायालय का फैसला आएगा, वह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पक्ष में होगा।

इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने भी सत्तार के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें शुरू से पता था कि भाजपा धीमे जहर की तरह है… लेकिन सत्तार भाई, आप सत्ता चाहते थे, इसलिए आप मजबूर थे।’’

भाषा खारी अमित

अमित


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