मौजूदा समय में मित्र या शत्रु को परिभाषित करना कठिन, भारत को अपने बलबूते कदम उठाने होंगे:चौहान
मौजूदा समय में मित्र या शत्रु को परिभाषित करना कठिन, भारत को अपने बलबूते कदम उठाने होंगे:चौहान
पुणे, 13 फरवरी (भाषा) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में स्थायी मित्र या शत्रु के बारे में धारणाएं तेजी से अविश्वसनीय होती जा रही हैं।
चौहान ने जोर देकर कहा कि भारत को जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए मानसिक, संरचनात्मक और भौतिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने रणनीतिक स्वायत्तता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित के अनुरूप साझेदारी मूल्यवान होती है लेकिन वे स्वदेशी क्षमता या चुनने की स्वतंत्रता का विकल्प नहीं हो सकतीं।
जनरल चौहान ने कहा, “आज की दुनिया में यह परिभाषित करना मुश्किल है कि आपके मित्र कौन हैं, आपके सहयोगी कौन हैं, आपके शत्रु कौन हैं और आपके विरोधी कौन हैं। रणनीतिक गठबंधन अस्थिर और लेन-देन पर आधारित हो गए हैं।”
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष यहां दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित ‘जय’ (संयुक्तता, आत्मनिर्भर नवाचार) संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “इसलिए, भारत को आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह तैयारी मानसिक, संरचनात्मक और भौतिक होनी चाहिए।”
जनरल चौहान ने बताया कि वैश्विक सुरक्षा वातावरण अनिश्चितता और अस्थिरता से चिह्नित नाटकीय परिवर्तनों से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, “घोषित युद्ध अब अप्रचलित होते जा रहे हैं। प्रतिस्पर्धा तेजी से परोक्ष अभियानों, गुप्त अभियानों और साइबर गतिविधियों के माध्यम से प्रकट हो रही है।”
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने बताया कि संज्ञानात्मक और सूचना युद्ध एक केंद्रीय युद्धक्षेत्र के रूप में उभरा है, जो सशस्त्र बलों के बजाय समाजों को निशाना बना रहा है। जनरल चौहान ने संगोष्ठी के विषय ‘जय से विजय’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक नारा नहीं बल्कि एक रणनीतिक सिद्धांत है, जो उद्देश्य को परिणामों से जोड़ता है।
भाषा जितेंद्र रंजन
रंजन

Facebook


