जलगांव: 13 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी व तीन भाई-बहनों की हत्या के दोषी को मृत्युदंड
जलगांव: 13 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी व तीन भाई-बहनों की हत्या के दोषी को मृत्युदंड
मुंबई, पांच जून (भाषा) महाराष्ट्र के जलगांव जिले की एक विशेष अदालत ने 13 वर्षीय एक बच्ची से दुष्कर्म करने और उसकी तथा उसके तीन नाबालिग भाई-बहनों की हत्या करने के मामले में 19 वर्षीय एक युवक को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को ‘पूर्व नियोजित और अत्यधिक क्रूर’ करार दिया।
विशेष पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) अदालत (भुसावल) के न्यायाधीश एस आर यादव ने बृहस्पतिवार को जारी अपने आदेश में कहा कि यह मामला ‘दुर्लभतम’ श्रेणी में आता है, जिसने न्यायिक और सामाजिक अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। अदालत ने जोर देकर कहा कि 19 वर्षीय सीताराम बारेला का यह कृत्य ‘अक्षम्य है और इसके लिए मृत्युदंड ही उचित है।’
विशेष न्यायाधीश ने कहा, ‘आरोपी ने पूर्व नियोजित, निर्मम, अत्यधिक क्रूर और अमानवीय तरीके से चार नाबालिग बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। उनमें से एक के साथ उसने दुष्कर्म भी किया।’
नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर चिंता जताते हुए अदालत ने रेखांकित किया कि युवा पीढ़ी की ‘कामुकता की हवस’ के कारण नाबालिगों की हत्या की जा रही है, इसलिए न्यायपालिका का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे लोगों को सख्त लहजे में सजा दे।
न्यायाधीश यादव ने अपने फैसले में कहा, ‘अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मेरा यह सुविचारित मत है कि आजीवन कारावास का विकल्प निश्चित रूप से बंद हो जाता है और आरोपी केवल मृत्युदंड का हकदार है।’
विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) उज्ज्वल निकम ने बताया कि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और पूरा मामला पारिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। हालांकि, अभियोजन पक्ष इन कड़ियों को बिना किसी रुकावट के जोड़ने में पूरी तरह सफल रहा।
यह जघन्य वारदात 15 अक्टूबर 2020 को जलगांव जिले के रावेर स्थित एक फार्महाउस पर हुई थी। घटना के समय आठ से 13 वर्ष की आयु के चारों बच्चे (दो लड़कियां और दो लड़के) घर पर अकेले थे, क्योंकि उनके माता-पिता एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होने मध्य प्रदेश गए हुए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, रात में उसी घर में रुके बारेला ने 13 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। जब उसने विरोध किया, तो बारेला ने कुल्हाड़ी से उस पर और उसके तीनों भाई-बहनों पर बेरहमी से हमला कर उनकी गर्दन और सिर पर गंभीर घाव किए, जिससे उनकी मौत हो गई।
घटना का खुलासा अगली सुबह तब हुआ जब खेत का मालिक बच्चों के घर गया और उसने चारों को खून से लथपथ पड़ा देखा।
निकम के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने खेत मालिक और पीड़ितों के पिता सहित 28 गवाहों के बयान दर्ज कराए। दोषी ठहराने में एक और महत्वपूर्ण सबूत यह रहा कि आरोपी के खून का नमूना 13 वर्षीय पीड़िता के चिकित्सीय परीक्षण के दौरान मिले डीएनए से मेल खा गया। इसके अलावा, अपराध करने के तुरंत बाद बारेला ने अपने पिता और चाचा को फोन कर दुष्कर्म और इन चारों हत्याओं की बात कबूल की थी।
अदालत ने बारेला को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 376(3) (16 वर्ष से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म) के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दोषी पाया।
भाषा सुमित माधव
माधव

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