जारंगे ने आरक्षण के लिए भूख हड़ताल के आठवें दिन पानी, इलाज लेने से इनकार किया
जारंगे ने आरक्षण के लिए भूख हड़ताल के आठवें दिन पानी, इलाज लेने से इनकार किया
जालना, पांच सितंबर (भाषा) मराठा आरक्षण के लिए मनोज जरांगे का आंदोलन शनिवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें दिए गए आश्वासनों को पूरा करने में विफल रही है, और इसके विरोध में उन्होंने पानी या चिकित्सा उपचार लेने से इनकार करते हुए आंदोलन को और तेज कर दिया।
इससे पहले हफ्ते की शुरुआत में, जरांगे राज्य सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल की अपील के बाद पानी पीने और नसों के जरिए तरल लेने के लिए सहमत हो गए थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी सहमति वापस ले ली है।
उन्होंने यहां अंतरवाली सराटी में विरोध स्थल पर डॉक्टरों से चिकित्सा जांच कराने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक उनकी मांगें असल में पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वह कोई इलाज नहीं कराएंगे।
जरांगे ने यहां मीडिया से कहा, “जब तक सरकार हमारी सभी मांगों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं करती, तब तक मैं कुछ भी नहीं लूंगा और न ही कोई इलाज कराऊंगा।” इस बीच, एक चिकित्सा दल ने उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश की।
उन्होंने आरोप लगाया कि महायुति सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया था कि करीब 58 लाख मराठों से जुड़े अभिलेखों पर काम शुरू किया जाएगा, ताकि समुदाय को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल सके, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने दावा किया कि हैदराबाद गजट से जुड़ी प्रक्रिया भी अभी तक शुरू नहीं की गई है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि सरकार की ओर से आरक्षण के मुद्दे से जुड़ी जानकारी गांवों तक सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से पहुंचाने का आश्वासन भी अब तक लागू नहीं किया गया है।
सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने इससे पहले कहा था कि उनकी मांगों पर फैसला एक या दो दिन के भीतर उन्हें बता दिया जाएगा।
जरांगे ने हालांकि कहा है कि मांगें पूरी होने तक वह अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह 12 सितंबर को मुंबई जाने के अपने फैसले पर कायम रहेंगे।
जरांगे ने मांग की है कि 12 सितंबर तक पात्र मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर सरकार शासनादेश (जीआर) जारी करे। इससे समुदाय के सदस्यों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
भाषा प्रशांत माधव
माधव

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