‘अपहरण’ मामला: अदालत ने राकांपा के दो नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया

'अपहरण' मामला: अदालत ने राकांपा के दो नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया

‘अपहरण’ मामला: अदालत ने राकांपा के दो नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया
Modified Date: March 25, 2026 / 06:34 pm IST
Published Date: March 25, 2026 6:34 pm IST

मुंबई, 25 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र की एक अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दो स्थानीय नेताओं को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है, जिन्हें पिछले सप्ताह सतारा जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव के दौरान जिला परिषद के एक सदस्य के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने इसके साथ ही गिरफ्तारी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने और उनके साथ हिरासत में दुर्व्यवहार का उल्लेख भी किया।

अदालत ने गिरफ्तारी के कागजात उपलब्ध कराने में विफल रहने पर पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि ‘‘आरोपी के मौलिक अधिकारों की कीमत पर हिरासत में पूछताछ की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) एस. इवारे ने सोमवार को राकांपा नेताओं अनिल शिवाजीराव देसाई और संदीप मांडवे को जमानत देते हुए इस बात पर जोर भी दिया कि पीड़ित ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया।

अदालत ने पुलिस को कारण बताओ नोटिस जारी करके अपने कृत्यों का स्पष्टीकरण देने का निर्देश भी दिया है।

राकांपा नेताओं को सतारा के एक जिला परिषद सदस्य का कथित तौर पर अपहरण करने और पिछले सप्ताह हुए जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव के दौरान उसे धमकाने के आरोप में सोमवार को गिरफ्तार किया गया।

जब आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, तो उन्होंने पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत की।

दावे के मद्देनजर, जेएमएफसी ने उनकी चिकित्सकीय जांच का निर्देश दिया, जिसके परिणामों से चोटों की पुष्टि हुई। अदालत ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट प्रथम दृष्टया पुलिस बर्बरता के आरोपों का समर्थन करती है।

अभियोजन पक्ष के मामले को तब झटका लगा जब पीड़ित ने स्वयं बाद में अपहरण के पुलिस के दावे का खंडन कर दिया।

अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने गिरफ्तारी के समय की गणना के लिए बार-बार कहे जाने के बावजूद गिरफ्तारी प्रपत्र प्रस्तुत नहीं किए।

मजिस्ट्रेट ने फैसला सुनाया, ‘दुर्व्यवहार का संकेत देने वाले चिकित्सा साक्ष्यों को देखते हुए, अदालत की राय है कि आगे पुलिस हिरासत देना उचित नहीं होगा और आरोपियों के मौलिक अधिकारों की कीमत पर हिरासत में पूछताछ की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’

इसके बाद अदालत ने दोनों को 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।

सतारा जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव शुक्रवार को हुए। आरोप है कि मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले पुलिस कुछ जिला परिषद सदस्यों को अपने साथ ले गई।

शिवसेना के मंत्री शंभूराज देसाई और राकांपा के मंत्री मकरंद पाटिल ने भी आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान स्थानीय पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

भाषा अमित रंजन

रंजन


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