मुंबई, 17 फरवरी (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने शहर पुलिस को कथित गैंगस्टर कुमार पिल्लै को उसके देश हांगकांग वापस भेजने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है।
अदालत ने यह कदम यह देखते हुए उठाया कि उसे उन सभी मामलों में बरी कर दिया गया है जिनके लिए उसे मूल रूप से प्रत्यर्पित किया गया था।
विशेष मकोका अदालत के न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने 13 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि उच्चतम न्यायालय के एक फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्यर्पण करने वाले देश की अनुमति के अभाव में आवेदक पर भारत में किसी अन्य लंबित मामलों में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ परिणामस्वरूप, अभियोजन पक्ष के पास आवेदक ( पिल्लै) को उसके गृह देश, यानी हांगकांग वापस भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।’’
अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि अभियोजन पक्ष ने अन्य लंबित मामलों में पिल्लै पर मुकदमा चलाने के लिए हांगकांग के अधिकारियों से अनुमति मांगी है।
मूल रूप से भारतीय नागरिक पिल्लै हांगकांग चला गया था और वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली। उसे 2012 के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद 2016 में सिंगापुर में गिरफ्तार किया गया और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया गया।
भारत ने सिंगापुर की सक्षम अदालत से उसके खिलाफ लंबित छह मामलों में उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। हालांकि, तीन मामलों में सुनवाई के लिए ही पिल्लै के प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली थी।
अदालत के आदेश में कहा गया है कि वे सभी मामले निपटा दिए गए हैं और आवेदक को बरी कर दिया गया है।
पिल्लै के वकील पंकज कावले ने तर्क दिया कि प्रत्यर्पण का उद्देश्य अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि आवेदक भारत का नागरिक नहीं है, इसलिए देश में उसका रहना वैध नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21 के तहत उसे हांगकांग वापस भेजा जाना आवश्यक है।
अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आवेदक के खिलाफ मामले लंबित हैं और उनमें कार्यवाही अभी पूरी नहीं हुई है। हालांकि, अदालत ने कहा कि प्रत्यर्पण केवल तीन मामलों के लिए था और उन मामलों में उसे बरी कर दिया गया है।
अदालत ने मुंबई पुलिस आयुक्त को पिल्लै की स्वदेश वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
भाषा शोभना मनीषा
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