महाराष्ट्र सरकार के मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती

महाराष्ट्र सरकार के मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती

महाराष्ट्र सरकार के मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती
Modified Date: February 20, 2026 / 07:00 pm IST
Published Date: February 20, 2026 7:00 pm IST

मुंबई, 20 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिए शिक्षा और नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द करने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है।

वकील सैयद एजाज अब्बास नकवी द्वारा दायर याचिका में महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा 17 फरवरी को जारी सरकारी आदेश को संविधान के उल्लंघन और मुस्लिम समुदाय के हितों के विरुद्ध करार दिया गया है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादी (महाराष्ट्र सरकार) अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव कर रही है। यह संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।’’

इसमें यह भी कहा गया कि आरक्षण रद्द करने के सरकार के फैसले का कोई तार्किक आधार नहीं है।

उच्च न्यायालय में याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है।

याचिकाकर्ता के वकील नितिन सातपुते ने कहा कि याचिका में उच्च न्यायालय से सरकार द्वारा 17 फरवरी को जारी प्रस्ताव को रद्द करने और अंतरिम आदेश के माध्यम से याचिका की सुनवाई तक इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

याचिका के अनुसार, जुलाई 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सरकार ने शिक्षा और नौकरियों में मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत और मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी, जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की श्रेणी में रखा गया था।

उच्च न्यायालय में चुनौती के बाद नौकरियों में आरक्षण रद्द कर दिया गया था, लेकिन शिक्षा में मुस्लिम समुदाय के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण बरकरार रखा गया।

नए सरकारी आदेश के अनुसार, विशेष पिछड़ा वर्ग (क) में शामिल सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदाय के लिए सरकारी, अर्ध-सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी पिछले निर्णय और अध्यादेश रद्द कर दिए गए हैं।

इसके साथ ही सरकार ने 2014 के पूर्व निर्णयों और परिपत्रों को रद्द कर दिया और विशेष पिछड़ा वर्ग के मुसलमानों को जाति और गैर-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र जारी करना बंद कर दिया है।

भाषा खारी माधव

माधव


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