मिट्टी की प्रतिमाओं के संबंध में प्रधानमंत्री की अपील पर महाराष्ट्र सरकार रुख स्पष्ट करे: अदालत

मिट्टी की प्रतिमाओं के संबंध में प्रधानमंत्री की अपील पर महाराष्ट्र सरकार रुख स्पष्ट करे: अदालत

मिट्टी की प्रतिमाओं के संबंध में प्रधानमंत्री की अपील पर महाराष्ट्र सरकार रुख स्पष्ट करे: अदालत
Modified Date: July 28, 2026 / 02:45 pm IST
Published Date: July 28, 2026 2:45 pm IST

मुंबई, 28 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने आगामी गणपति उत्सव के दौरान पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों का इस्तेमाल करने संबंधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर महाराष्ट्र सरकार से रुख स्पष्ट करने को कहा है।

न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों के इस्तेमाल के खिलाफ कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से सवाल किए और महाधिवक्ता मिलिंद साठे को सरकार का पक्ष स्पष्ट करने के लिए बुधवार तक का समय दिया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 2020 में जारी दिशानिर्देश में पीओपी की मूर्तियों पर रोक लगा दी थी।

अदालत ने रविवार को प्रसारित प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने लोगों से पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियां इस्तेमाल करने की अपील की थी। अदालत ने इस पर सरकार की राय मांगी।

पिछले साल सीपीसीबी द्वारा यह स्पष्ट किये जाने के बाद कि उसका दिशानिर्देश परामर्श प्रकृति का है, अदालत ने राज्य सरकार की 2025 की नीति के अनुसार प्राकृतिक जल स्रोतों में छह फुट से अधिक ऊंची पीओपी मूर्तियों के विसर्जन की अनुमति दे दी।

जनहित याचिकाओं में सीपीसीबी के दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करवाने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, पीओपी की मूर्तियां बनाने वालों ने भी याचिकाएं दायर की हैं और दावा किया है कि इससे उनके कारोबार करने का मौलिक अधिकार प्रभावित होगा।

भाषा धीरज अमित

अमित


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