‘मासूम’ की शुरुआत खराब रही, लेकिन फिल्म को बाद में मिली कामयाबी : शेखर कपूर

'मासूम' की शुरुआत खराब रही, लेकिन फिल्म को बाद में मिली कामयाबी : शेखर कपूर

‘मासूम’ की शुरुआत खराब रही, लेकिन फिल्म को बाद में मिली कामयाबी : शेखर कपूर
Modified Date: February 9, 2026 / 07:14 pm IST
Published Date: February 9, 2026 7:14 pm IST

मुंबई, नौ फरवरी (भाषा) फिल्मकार शेखर कपूर का कहना है कि ‘मासूम’ की शुरुआत काफी खराब रही थी, लेकिन धीरे-धीरे फिल्म ने लोकप्रियता हासिल की और बाद में लोगों ने इसे काफी सराहा था।

उन्होंने कहा कि ‘मासूम’ की रिलीज के पहले दिन पहला शो देखने के लिए सिनेमाघर में केवल दो लोग आए थे , जिनमें से एक वह खुद थे।

कपूर ने 1983 में रिलीज हुई फिल्म की एक तस्वीर साझा करते हुए फिल्म को लेकर दर्शकों की पहले दिन की निराशाजनक प्रतिक्रिया के बारे में लिखा। यह फिल्म उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।

फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, उर्मिला मातोंडकर, जुगल हंसराज और आराधना श्रीवास्तव जैसे कलाकारों ने अहम भूमिका निभाई है।

फिल्मकार ने कहा, ‘‘ उन दिनों सिनेमा के टिकटों की कालाबाजारी बहुत होती थी… कुछ युवक, और यहां तक कि गिरोह, बड़ी मात्रा में सिनेमा टिकट खरीदते थे और फिर शो वाले दिन उन्हें ऊंची कीमतों पर बेचते थे… लेकिन, मासूम की रिलीज के पहले दिन ऐसा नहीं हुआ और सिनेमाघर बिल्कुल खाली रहे।’’

शेखर कपूर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ सिनेमाघर से बाहर निकलते ही बेहद गुस्से में दिख रहे कुछ लड़कों ने मुझे घेर लिया जब उन्हें पता चला कि मैं फिल्म का निर्देशक हूं… उस दिन उनका पैसा डूब गया था। मैं काफी निराश दिख रहा था। तभी उनमें से एक लड़के को मुझ पर दया आ गई और उसने कहा, ‘सर… समस्या यह है कि आपने एक आर्टिकल फिल्म बनाई है… अगर आप करियर बनाना चाहते हैं, तो ऐसा मत कीजिए।’ ’’

निर्देशक ने कहा कि वह लगातार सोच रहे थे कि “आर्टिकल फिल्म” का क्या मतलब है, तभी अचानक उन्हें समझ आया कि उस व्यक्ति का मतलब था कि उन्होंने एक “कलात्मक फिल्म” बनाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘फिल्म जब रिलीज हुई उस शुक्रवार को… सारे सिनेमाघर खाली थे… शनिवार, रविवार, सोमवार और मंगलवार को भी यही हाल था। फिल्म के वितरकों ने फिल्म को चलाने की कोशिश करना छोड़ दिया। खाली सिनेमाघरों में फिल्म दिखाना बहुत महंगा पड़ रहा था।’’

फिल्मकार ने कहा, ‘‘ मुझे वो दिन याद है… जब फिल्म के वितरकों ने मुझे बताया कि उन्होंने सिनेमाघरों में फिल्म दिखाने की कोशिश छोड़ दी है… मैं मुंबई की सड़कों पर घूम रहा था और सोच रहा था कि अब मैं अपनी जिंदगी में आगे क्या करूंगा, क्योंकि फिल्में बनाना अब मेरे लिए कोई विकल्प नहीं रह गया था।’’

फिल्मकार ने बताया कि कैसे उनके एक दोस्त ने उन्हें फोन कर फिल्म को मिल रही सराहना के बारे में उन्हें जानकारी दी।

शेखर कपूर ने कहा, ‘‘ एक दोस्त ने मुझे फोन किया और पूछा कि क्या मैं उसे ‘मासूम’ के टिकट दिलाने में मदद कर सकता हूं। मैंने उससे कहा कि यह एक बुरा मजाक था। लेकिन फिर… बृहस्पतिवार को एक सिनेमाघर पूरी तरह भर गया… फिर शुक्रवार को टिकट खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गईं… और सप्ताहांत में वितरक उन सिनेमाघरों को वापस पाने के लिए हाथ-पैर मार रहे थे जिन्हें उन्होंने छोड़ दिया था, और मेरी ‘आर्टिकल’ फिल्म हिट घोषित हो गई।’’

शेखर कपूर “मासूम, द नेक्स्ट जेनरेशन” नामक शीर्षक से फिल्म का सीक्वल बना रहे हैं।

भाषा रवि कांत प्रशांत

प्रशांत


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