महज व्हाट्सऐप ग्रुप बनाना कर्मी को सेवानिवृत करने का आधार नहीं हो सकता: उच्च न्यायालय

महज व्हाट्सऐप ग्रुप बनाना कर्मी को सेवानिवृत करने का आधार नहीं हो सकता: उच्च न्यायालय

महज व्हाट्सऐप ग्रुप बनाना कर्मी को सेवानिवृत करने का आधार नहीं हो सकता: उच्च न्यायालय
Modified Date: September 18, 2026 / 05:24 pm IST
Published Date: September 18, 2026 5:24 pm IST

मुंबई, 18 सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने पूर्व विद्यार्थियों के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाने पर एक प्रोफेसर को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत करने के ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज’ (टीआईएसएस) के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि नियोक्ता की मंजूरी के बिना ऐसा ग्रुप बनाने मात्र को किसी कामयाब करियर को खत्म करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रोफ़ेसर डॉ. स्वपन गरैन को दी गई सजा बेतुकी और अपराध के अनुपात में बहुत अधिक है। उच्च न्यायालय ने अंग्रेज बैरिस्टर और न्यायाधीश लॉर्ड डिप्लॉक को उद्धृत करते हुए कहा, ‘‘अखरोट तोड़ने के लिए आप हथौड़े का इस्तेमाल नहीं कर सकते।’’

न्यायमूर्ति एम एस कार्निक और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की खंडपीठ ने 16 सितंबर के अपने निर्णय में कहा कि प्रोफेसर पर एकमात्र आरोप यह था कि उन्होंने टीआईएसएस के पूर्व विद्यार्थियों का एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था और उसका इस्तेमाल ‘प्लेसमेंट सर्विस’ का काम करने के लिए कर रहे थे।

खंडपीठ ने माना कि डॉ. गरैन के खिलाफ सजा का आदेश (अनिवार्य सेवानिवृति का) गलत है और ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि वह ‘प्लेसमेंट सर्विस’ के लिए पैसे ले रहे थे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि व्हाट्सऐप ग्रुप सिर्फ़ टीआईएसएस के पूर्व विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा मंच था जहां वे ग्रुप के दूसरे सदस्यों के काम की जानकारी साझा कर सकते थे।

खंडपीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि संस्थान से इसके लिए मंज़ूरी नहीं ली गई थी, इतनी कड़ी सज़ा देने का कोई ठोस आधार नहीं हो सकता।

खंडपीठ ने प्रोफ़ेसर को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत करने वाले आदेश को रद्द कर दिया और टीआईएसएस को आदेश दिया कि वह गरैन को उनकी नौकरी से निकाले जाने की तारीख से लेकर सेवानिवृति की तारीख तक का 50 प्रतिशत बकाया वेतन दें।

गरैन ने अपनी याचिका में 2017 के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत करने की सज़ा दी गई थी। उन्होंने टीआईएसएस को उन्हें फिर से नौकरी पर रखने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था।

याचिका के अनुसार, गरैन को 1985 में टीआईएसएस में प्रोफ़ेसर के तौर पर नियुक्त किया गया था। टीआईएसएस वही संस्थान है जहां से उन्होंने खुद पढ़ाई की थी।

भाषा

राजकुमार माधव

माधव


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