Mother Runs For Daughter Fees: न ट्रेनिंग और न पैर में जूते..बेटियों के भविष्य के लिए मां ने लगाई रेस, मैराथन में मारी बाजी, मां का जज्बा देख दुनिया रह गई दंग

Mother Runs For Daughter Fees: न ट्रेनिंग और न पैर में जूते..बेटियों के भविष्य के लिए मां ने लगाई रेस, मैराथन में मारी बाजी, मां का जज्बा देख दुनिया रह गई दंग

Mother Runs For Daughter Fees: न ट्रेनिंग और न पैर में जूते..बेटियों के भविष्य के लिए मां ने लगाई रेस, मैराथन में मारी बाजी, मां का जज्बा देख दुनिया रह गई दंग

Mother Runs For Daughter Fees | Photo Credit: IBC24

Modified Date: September 2, 2026 / 12:39 pm IST
Published Date: September 2, 2026 12:38 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बेटियों की पढ़ाई के लिए दौड़ में हिस्सा
  • चप्पल हाथ में लेकर दौड़ती रहीं
  • मैराथन में मारी बाजी

बीड: Mother Runs For Daughter Fees कहते हैं मां अपने बच्चों की हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश पूरी करने के लिए किसी भी मुश्किल से गुजर सकती है। बच्चों की खुशी के लिए मां हर चुनौती का सामना करने को तैयार रहती है और जरूरत पड़े तो किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटती। (Mother Marathon Runner) ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के बीड जिले से सामने आया है, जहां एक मां ने अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया और ऐसी दौड़ लगाई कि हर कोई उनकी हिम्मत का कायल हो गया।

पति के निधन के बाद संभालने लगी जिम्मेदारी

Mother Runs For Daughter Fees जानकारी के अनुसार, मामला अंबाजोगाई का है। बताया जा रहा है कि अंबाजोगाई की रहने वाली रमाबाई रणवीर शहर की एक अकादमी में खाना बनाने का काम करती हैं। पति के निधन के बाद अपनी दो बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी उन पर आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने यह संकल्प लिया कि उनकी दोनों बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले।

रेस से जीते 3000 रुपये

हालही में शहर में एक मैराथन दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें महिला ने भी भाग लिया और मैराथन दौड़ते दौड़ते महिला का चप्पल फिसलने लगा। जिसके बाद उन्होंने चप्पल को हाथ में उठा लिया और युवा धावकों को पीछे छोड़ते हुए नंगे पैर ही दौड़ती चली गईं। इस दौड़ में महिला ने पहला स्थान हासिल कर 3,000 रुपये का नकद ईनाम जीता, जिसका इस्तेमाल वो अपनी बेटी की पढ़ाई में करेंगी।

जीतने के लिए लिया संकल्प

अपनी जीत के बारे में बात करते हुए रमाबाई ने कहा कि रेस में कई महिलाएं शामिल थीं, लेकिन वह इनाम जीतने के लिए पक्का इरादा कर चुकी थीं। उन्होंने कहा कि दौड़ते समय उन्हें अपनी बेटियों का भविष्य दिखाई दे रहा था और उन्होंने इनाम में मिले 3,000 रुपये से उनके लिए किताबें खरीदने का प्लान बनाया था। उनकी बेटी पूजा ने भी रेस में हिस्सा लिया और दूसरे नंबर पर रही। पूजा ने कहा कि उन्होंने अपनी मां को हिस्सा लेने के लिए हिम्मत दी थी, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह पहले नंबर पर आएंगी।

इन्हें भी पढ़ें:-


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

IBC24 डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं, जहां मेरी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति सहित प्रमुख विषयों की खबरों की कवरेज और प्रस्तुति है। वर्ष 2016 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हूं और अब तक 10 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया है। विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए न्यूज़ राइटिंग और डिजिटल टूल्स में दक्षता हासिल की है। मेरे लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है—सटीक, तेज और असरदार जानकारी पाठकों तक पहुंचाना मेरा लक्ष्य है। बदलते डिजिटल दौर में खुद को लगातार अपडेट कर, कंटेंट की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।