मुंबई, 20 सितंबर (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ताओं सृष्टि खन्ना और प्रशांत पुंडीर ने आरोप लगाया कि 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ के पूर्व नेता उमर खालिद पर बनी एक वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन आयोजन स्थल पर छापा मारकर रद्द करवा दिया गया।
खन्ना ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें 19 सितंबर को मुंबई में खालिद और 2020 से ही जेल में बंद शरजील इमाम के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजंट’ का प्रदर्शन करना था।
पुंडीर ने शनिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मुंबई पुलिस ने कायरता की सारी हदें पार कर दी हैं! उन्होंने उमर खालिद की स्क्रीनिंग के लिए हमारे मूल आयोजन स्थल पर भी छापा मारा है, जबकि डर के माहौल के कारण हमारे लिए वहां कार्यक्रम पहले ही रद्द कर दिया गया था।’’
पुंडीर ने कहा, ‘‘उन्होंने कल हमारे आयोजन स्थल के प्रबंधक को धमकी दी और स्क्रीनिंग रद्द करवा दी। हमने सार्वजनिक रूप से यह भी बताया था कि स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई है, लेकिन मुंबई पुलिस ने फिर भी आज आयोजन स्थल पर छापा मारा। ऐसा उमर खालिद और उसकी कथित अन्यायपूर्ण कैद के बारे में सच्चाई को दबाने के लिए किया गया।’’
पुंडीर ने कहा कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी आयोजन स्थल के आसपास घूम रहे थे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां वृत्तचित्र का प्रदर्शन न हो।
खन्ना ने भी आरोप लगाया कि उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में होने वाली वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग रद्द करने के लिए मुंबई पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आयोजन स्थल पहुंचकर डरा-धमका रहे हैं।
खन्ना ने कहा, ‘‘हमारे दूसरे आयोजन स्थल पर पुलिस पहले सादे कपड़ों में पहुंची और बाद में पुलिस वैन में आई। वहां के प्रबंधक को धमकी दी गई और स्क्रीनिंग रद्द करने के लिए दबाव डाला गया तथा अंततः इसे रद्द कर दिया गया। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई।’’
खन्ना ने कहा कि वे संभावित जगहों की तलाश के दौरान बांद्रा के एक अन्य प्रसिद्ध स्थल के प्रबंधन से बातचीत ही कर पाए थे कि वहां भी पुलिस पहुंच गई।
खन्ना ने दावा किया, ‘‘वहां बात नहीं बन पाई थी। वे (पुलिस) आज सुबह सादे कपड़ों में वहां पहुंच गए। उनके पास पहले से ही स्क्रीनिंग की जानकारी थी और उन्होंने वहां के प्रबंधन से इसे रद्द करने को कहा।’’
फिल्म निर्माता ललित वाचानी द्वारा निर्देशित ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजंट’ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र खालिद पर केंद्रित है। खालिद को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कथित बड़ी साजिश के सिलसिले में सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था।
खालिद पर इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) और अन्य प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद से वह हिरासत में हैं।
इस बीच, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने देश के विभिन्न हिस्सों में इस वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग का विरोध करते हुए कहा है कि गैर-प्रमाणित फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन सिनेमैटोग्राफ अधिनियम का उल्लंघन होगा, जब तक कि इसके लिए विशेष छूट प्राप्त न की गई हो।
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