राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह राजधानी दिल्ली में ही होना चाहिए : सुप्रिया सुले
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह राजधानी दिल्ली में ही होना चाहिए : सुप्रिया सुले
मुंबई, 10 सितंबर (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह नयी दिल्ली में ही आयोजित किया जाना चाहिए क्योंकि यह देश की राजधानी है। सुले का यह बयान सरकार द्वारा इस साल समारोह को गुजरात स्थानांतरित करने के फैसले के बाद आया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली और मुंबई के महत्व को कम करने का प्रयास हो सकता है क्योंकि क्रिकेट विश्व कप के मैचों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की यात्राओं समेत कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन अब गुजरात में किया जा रहा है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इस बार दिल्ली से बाहर गुजरात के केवड़िया में आयोजित होगा, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को पुरस्कार प्रदान करेंगी।
केवड़िया का नाम बदलकर अब एकता नगर कर दिया गया है, जो दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का स्थल है। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के नाम से विख्यात यह प्रतिमा 597 फुट ऊंची है और इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में किया था।
सुले ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘देश के 72 साल के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार गुजरात में आयोजित हो रहे हैं। हमारा मानना है कि राष्ट्रीय पुरस्कार हमेशा दिल्ली में ही प्रदान किए जाने चाहिए। जो चीजें राष्ट्रीय स्तर की हैं, वे राष्ट्रीय स्तर पर ही रहनी चाहिए।’’
महाराष्ट्र के बारामती से सांसद सुले ने कहा, ‘‘जब बड़े कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित होते हैं तो उन्हें दिल्ली में ही होना चाहिए। इसी वजह से उन्हें राष्ट्रीय कार्यक्रम कहा जाता है, क्योंकि दिल्ली देश की राष्ट्रीय राजधानी है। अगर यह राष्ट्रीय कार्यक्रम है तो इसे राष्ट्रीय राजधानी में ही होना चाहिए। इसे कहीं और कैसे आयोजित किया जा सकता है?’’
उन्होंने कहा कि क्रिकेट विश्व कप के मैचों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की यात्राओं जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी गुजरात में किया जा रहा है।
राकांपा (शप) की नेता ने कहा, ‘‘यह दिल्ली और मुंबई के महत्व को कम करने का प्रयास हो सकता है। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।’’
भाषाओं के मुद्दे पर सुले ने कहा कि मराठी और हिंदी दोनों महत्वपूर्ण हैं और लोगों को जितनी भाषाएं सीखनी हों, सीखनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मराठी और हिंदी दोनों हमारी भाषाएं हैं और लोगों को दोनों का ज्ञान होना चाहिए। अधिक भाषाएं सीखना अच्छी बात है। लेकिन किसी भाषा को किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। अगर कोई हिंदी, गुजराती, तमिल या तेलुगु सीखना चाहता है तो यह अच्छी बात है।’’
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुंबई-गोवा राजमार्ग अब तक पूरा नहीं होने पर शर्मिंदगी जताने और इसके उद्घाटन में शामिल नहीं होने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुले ने कहा कि यह एक संवेदनशील नेता के तौर पर गडकरी की भावना को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह गडकरी साहब की महानता है। वह महाराष्ट्र और देश के एक संवेदनशील नेता के रूप में यह बात कह रहे हैं। हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। उनका बयान दिल से आया है क्योंकि वह दिल से काम करते हैं।’’
महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति और किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर सुले ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान घोषित कृषि ऋण माफी को याद किया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब राकांपा-कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में और जब पवार साहब (शरद पवार) कृषि मंत्री थे, तब 70,000 करोड़ रुपये की कृषि ऋण माफी की घोषणा की गई थी। मनमोहन सिंह खुद महाराष्ट्र आए थे और इससे बड़ा बदलाव आया था।’’
सुले ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने, रिपोर्ट तैयार करने और केंद्र सरकार से पूरी कृषि ऋण माफी की मांग करने की अपील की।
भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश
नरेश

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