प्रख्यात पुरातत्वविद् शिरीन रत्नागर का निधन

प्रख्यात पुरातत्वविद् शिरीन रत्नागर का निधन

प्रख्यात पुरातत्वविद् शिरीन रत्नागर का निधन
Modified Date: May 26, 2026 / 11:53 am IST
Published Date: May 26, 2026 11:53 am IST

मुंबई, 26 मई (भाषा) प्रख्यात पुरातत्वविद् शिरीन रत्नागर का मुंबई में संक्षिप्त बीमारी के बाद सोमवार रात को निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

वह 82 वर्ष की थीं।

भारत की सबसे प्रतिष्ठित पुरातत्वविदों में से एक शिरीन हड़प्पा इतिहास की विशेषज्ञ थीं।

उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता में विशेषज्ञता हासिल की थी जिसमें कलाकृतियों और स्थलों के प्रमाण-आधारित विश्लेषण के माध्यम से इसके व्यापार नेटवर्क, सामाजिक संगठन और पतन पर विशेष ध्यान दिया गया था।

पुणे के डेक्कन कॉलेज और ‘यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन’ के पुरातत्व संस्थान में शिक्षा प्राप्त करने के बाद, शिरीन ने मेसोपोटामिया के पुरातत्व का अध्ययन किया। इसके बाद वह दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र में पुरातत्व और प्राचीन इतिहास की प्रोफेसर बनीं। उन्होंने 2000 में सेवानिवृत्त होने के बाद मुंबई में स्वतंत्र शोध कार्य किया।

शिरीन द्वारा लिखी किताबों में ‘एनकाउंटर्स: द वेस्टर्ली ट्रेड ऑफ द हड़प्पा सिविलाइजेशन’ (1981) शामिल है। इसके अलावा उन्होंने ‘अंडरस्टैंडिंग हड़प्पा: सिविलाइजेशन ऑफ द इंडस’ (2001) भी लिखी, जिसमें हड़प्पा की अर्थव्यवस्था, शहरीकरण और अंतरसांस्कृतिक संपर्कों का विस्तृत और साक्ष्य-आधारित अवलोकन प्रस्तुत किया गया है।

शिरीन का जन्म 1944 में मुंबई में हुआ था और उन्होंने पुरातत्व विज्ञान में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने से पहले इतिहास में स्नातक किया था।

भाषा प्रचेता सिम्मी

सिम्मी


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