जब्त जहाजों के मालिकों ने फंसे नाविकों के साथ ‘पालतू जानवरों’ से भी बुरा बर्ताव किया : अदालत
जब्त जहाजों के मालिकों ने फंसे नाविकों के साथ ‘पालतू जानवरों’ से भी बुरा बर्ताव किया : अदालत
मुंबई, पांच मई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई तट के पास जब्त किए गए तीन जहाजों पर फंसे 50 नाविकों को छोड़ने का मंगलवार को निर्देश दिया।
अदालत ने जहाज मालिकों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे चालक दल के सदस्यों को महीनों से नाम मात्र के लिए भोजन और पानी उपलब्ध कराके उनके साथ “पालतू जानवरों” से भी बुरा व्यवहार कर रहे हैं।
उच्च न्यायालय ने जहाज मालिकों पर “मानव जीवन की बिल्कुल भी परवाह न करने” और नाविकों के स्वास्थ्य के बजाय अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उसने कहा, “जीवन केवल एक बार मिलता है। हम पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते हैं।”
तीनों जहाज पर फंसे नाविकों ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में दावा किया कि उनके पास नाम मात्र के लिए भोजन और पानी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि तीनों जहाज को तेल और कोयले के अवैध परिवहन के आरोप में मुंबई से लगभग 11 समुद्री मील दूर बीच समुद्र में जब्त कर लिया गया था, जिसके बाद मालिकों ने नाविकों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
एमटी एस्फाल्ट स्टार, एमटी स्टेलर रूबी और एमटी अल जाफजिया नामक जहाजों पर लगभग 50 नाविक फंसे हुए हैं, जिनमें से सात ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के साथ उच्च न्यायालय का रुख किया।
उच्च न्यायालय ने सोमवार को येलो गेट पुलिस को मंगलवार को सभी 50 नाविकों को उसके समक्ष पेश करने का आदेश दिया।
सभी नाविकों को न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति हितेन वेनेगांवकर की पीठ के समक्ष पेश किया गया।
नाविकों ने पीठ को बताया कि वे जहाजों पर वापस नहीं जाना चाहते, क्योंकि उन्हें वहां गलत तरीके से हिरासत में रखा गया है।
नाविकों ने पीठ से कहा कि वे जहाजों पर नाम मात्र के भोजन के साथ रह रहे हैं और उन्हें रोजाना केवल 300 मिलीलीटर पानी दिया जा रहा है।
अदालत ने जहाज मालिकों को फटकार लगाते हुए कहा, “आप (जहाज मालिक) कर्मचारियों को रोजाना केवल 300 मिलीलीटर पानी कैसे दे सकते हैं? हमारे घरों में पालतू जानवरों को भी रोजाना इससे अधिक पानी मिलता है। हम मानव जीवन के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे। जीवन एक ही बार मिलता है। हम पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते।”
उच्च न्यायालय ने सभी 50 नाविकों को छोड़ने का आदेश देते हुए कहा कि वह मानव जीवन की रक्षा करेगा, जबकि जहाज मालिक अपने जब्त जहाजों का ख्याल कर सकते हैं।
उसने कहा, “हमें आपके जहाज और नौकाओं से कोई लेना-देना नहीं है। यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के दायरे में नहीं आता है। मालिकों का आचरण ऐसा है कि वे मानव जीवन की कोई अहमियत नहीं समझते। उन्हें केवल अपनी व्यावसायिक गतिविधियों की परवाह है।”
अदालत ने कहा कि भोजन और पानी की नाम मात्र की आपूर्ति से नाविकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
उसने येलो गेट पुलिस को सभी 50 नाविकों की रिहाई की औपचारिकताएं पूरी करने और उन्हें छोड़ने का निर्देश दिया।
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश

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