मुंबई को जलापूर्ति करने वाले जलाशयों में सात प्रतिशत से भी भंडार
मुंबई को जलापूर्ति करने वाले जलाशयों में सात प्रतिशत से भी भंडार
मुंबई, 29 जून (भाषा) मानसून के देर से पहुंचने और इस वर्ष अब तक सामान्य से कम बारिश होने के कारण मुंबई को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। महानगर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले सात जलाशयों में पानी कुल भंडारण क्षमता का सात प्रतिशत से भी कम रह गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह छह बजे तक इन सातों जलाशयों में कुल 1,00,279 मिलियन लीटर पानी मौजूद था, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 6.93 प्रतिशत है।
इसके विपरीत, पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों में कुल क्षमता का 39.5 प्रतिशत यानी 5,71,670 मिलियन लीटर पानी था।
मुंबई और उसके महानगरीय क्षेत्र को पेयजल उपलब्ध कराने वाली जलाशय प्रणाली में भातसा, अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, तुलसी और विहार जलाशय शामिल हैं।
इन सातों जलाशयों की कुल जल भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर है। इन्हीं से मुंबई को प्रतिदिन लगभग 4,000 मिलियन लीटर पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
आंकड़ों के अनुसार, चार प्रमुख जलाशयों अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा और मध्य वैतरणा में कुल 46,192 मिलियन लीटर पानी बचा है, जो उनकी संयुक्त भंडराण क्षमता का 6.65 प्रतिशत है।
जलाशयों में उपलब्ध पानी के लिहाज से विहार सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां इसकी भंडारण क्षमता का 45.13 प्रतिशत पानी मौजूद है। इसके बाद तुलसी में 24.26 प्रतिशत और मोडक सागर में 18.47 प्रतिशत पानी है।
आमतौर पर मानसून 10 जून के आसपास मुंबई पहुंच जाता है, लेकिन इस वर्ष इसके आगमन में देरी हुई है। इसके विपरीत, पिछले वर्ष मानसून सामान्य समय से काफी पहले, मई में ही मुंबई पहुंच गया था।
भाषा तान्या खारी
खारी

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