ट्रक की टक्कर में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को 63.8 लाख रुपये का मुआवजा
ट्रक की टक्कर में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को 63.8 लाख रुपये का मुआवजा
ठाणे, नौ अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने वर्ष 2018 में ट्रक की टक्कर के कारण जान गंवाने वाले 34 वर्षीय व्यक्ति के परिवार को 63.8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
एमएसीटी के सदस्य आर. वी. मोहिते ने शुक्रवार को ट्रक मालिक राजाराम आर. गुप्ता और बीमा कंपनी श्री राम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मुआवजे की राशि के लिए संयुक्त और पृथक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया। इसके साथ ही 2018 में याचिका दायर किए जाने की तारीख से राशि का भुगतान होने तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
यह याचिका मृतक शरद गायकवाड की पत्नी, उनके दो बच्चों और माता-पिता ने दायर की थी।
याचिका में कहा गया था कि चार जून 2018 को स्टोर मैनेजर के पद पर कार्यरत पीड़ित नासिक-मुंबई राजमार्ग पर एक मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर जा रहा था। याचिका में कहा गया था कि इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक ने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी और इसमें उसे गंभीर चोटें आईं और कुछ दिन बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने ट्रक चालक रामइकबाल राजितराम मिश्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
बीमा कंपनी ने मुआवजे के दावे का विरोध करते हुए ट्रक की दुर्घटना में संलिप्तता पर सवाल उठाए थे और तीन जुलाई 2018 को प्राथमिकी दर्ज किए जाने में हुई 29 दिन की देरी का भी हवाला दिया। इसके अलावा उसने चालक की पहचान पर सवाल उठाते हुए बीमा पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा कि दुर्घटना के बाद मृतक के परिजनों की प्राथमिकता उसके स्वास्थ्य और जीवन को बचाना थी। उनसे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे सबसे पहले पुलिस थाने पहुंचते।
न्यायाधिकरण ने कहा कि आरोपपत्र और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही से जब दुर्घटना में शामिल वाहन की पुष्टि होती है, तो प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी मुआवजा देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती।
घटना के वक्त जान गंवाने वाले व्यक्ति की मासिक आय (23,800 रुपये) और उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए न्यायाधिकरण ने अंतिम मुआवजा राशि 63.8 लाख रुपये निर्धारित की।
भाषा अमित संतोष
संतोष

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