सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना शिवाजी से की, फडणवीस ने टिप्पणी को ‘शर्मनाक’ करार दिया

सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना शिवाजी से की, फडणवीस ने टिप्पणी को ‘शर्मनाक’ करार दिया

सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना शिवाजी से की, फडणवीस ने टिप्पणी को ‘शर्मनाक’ करार दिया
Modified Date: February 14, 2026 / 08:53 pm IST
Published Date: February 14, 2026 8:53 pm IST

नागपुर/बुलढाणा, 14 फरवरी (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की मैसूर के 18वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के “समकक्ष” बताने वाली टिप्पणी को लेकर राज्य में सोमवार को सियासी विवाद खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सपकाल की तीखी आलोचना करते हुए उनकी टिप्पणी को “शर्मनाक” करार दिया।

टीपू सुल्तान इतिहास की एक विवादास्पद हस्ती हैं। जहां एक वर्ग अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनकी वीरता की तारीफ करता है। वहीं, दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हिंदुओं के साथ “दुर्व्यवहार” के लिए उनकी आलोचना करता है। इसके विपरीत, छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी सैन्य प्रतिभा के साथ-साथ परोपकार और सामाजिक कल्याण पर आधारित प्रशासनिक कौशल के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है।

बुलढाणा में संवाददाताओं से मुखातिब सपकाल ने मालेगांव महानगरपालिका की उप-महापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने को लेकर हुए विवाद पर बात की, जिसका क्षेत्र के शिवसेना पार्षदों और हिंदू संगठनों ने विरोध किया था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और ‘स्वराज’ के विचार को पेश करने के उनके तरीके का जिक्र करते हुए टीपू सुल्तान के अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का आह्वान करने का उदाहरण दिया और दावा किया कि यह लड़ाई शिवाजी महाराज के आदर्श की तर्ज पर थी।

सपकाल ने कहा, “इस तरह टीपू सुल्तान एक योद्धा और भारत के भूमिपुत्र के रूप में उभरे। उन्होंने कभी भी जहरीली विचारधाराओं को नहीं अपनाया। हमें टीपू सुल्तान को वीरता के प्रतीक के रूप में शिवाजी महाराज के समकक्ष मानना ​​चाहिए।”

फडणवीस ने सपकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तुलना निंदनीय है और कांग्रेस नेता को खुद पर शर्म आनी चाहिए।

उन्होंने नागपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “महाराष्ट्र इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। सपकाल को छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और उसके सहयोगी दलों को सपकाल की टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।”

बाद में सपकाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता अतुलनीय है, जबकि टीपू सुल्तान वीर और स्वराज प्रेमी थे।

उन्होंने लिखा, “छत्रपति शिवाजी महाराज को आदर्श मानकर ही टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।”

सपकाल ने दावा किया कि जब टीपू सुल्तान विदेशी शासकों से लड़ रहे थे, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा पर अमल करने वाले लोग अंग्रेजों के लिए जासूसी और गुलामी कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “इसलिए देवेंद्र फडणवीस को इतिहास पढ़ाने का दिखावा नहीं करना चाहिए। महाराष्ट्र के लोग नहीं भूले हैं कि भाजपा-आरएसएस, (पूर्व राज्यपाल) भगतसिंह कोश्यारी और अन्य लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ क्या-क्या बोला और कैसे उनका अपमान किया।”

सपकाल ने एक चित्र साझा करते हुए लिखा, “संविधान की मूल प्रति पर शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान दोनों की तस्वीरें हैं।”

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भी फडणवीस पर जमकर निशाना साधा।

एक बयान में लोंढे ने कहा कि भाजपा टीपू सुल्तान के बारे में सपकाल की टिप्पणी में “समकक्ष” शब्द के इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करके विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे सांप्रदायिक तनाव भड़काने का “हताशा भरा प्रयास” करार दिया।

लोंढे ने दावा किया कि भाजपा राज्य में बेरोजगारी, महंगाई, किसान आत्महत्या के मामलों और बिजली की बढ़ती दरों जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ध्रुवीकरण को बढ़ावा देकर शासन से संबंधित मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के भाजपा के प्रयासों की कड़ी निंदा करती है।

भाषा पारुल माधव

माधव


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