ठाणे की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को बरी किया, महिला के संबंध जारी रखने को बनाया आधार

ठाणे की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को बरी किया, महिला के संबंध जारी रखने को बनाया आधार

ठाणे की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को बरी किया, महिला के संबंध जारी रखने को बनाया आधार
Modified Date: July 5, 2026 / 04:06 pm IST
Published Date: July 5, 2026 4:06 pm IST

ठाणे, पांच जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप से एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि आरोपी के विवाहित होने की जानकारी होने के बावजूद महिला का उसके साथ संबंध रखना, बिना सहमति के शारीरिक संबंध बनाने के दावे पर संदेह उत्पन्न करता है।

सत्र न्यायाधीश जी. टी. पवार ने एक जुलाई के अपने आदेश में कहा कि ऐसे में यह दावा संदेहास्पद प्रतीत होता है कि संबंध, विवाह की आड़ में बनाए गए थे या इसमें महिला की सहमति नहीं थी। आदेश की प्रति शनिवार को उपलब्ध कराई गई।

अदालत ने ठाणे जिले के मुंब्रा निवासी 30 वर्षीय आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (दुष्कर्म), 376(2)(एन) (बार-बार दुष्कर्म), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 504 (जानबूझकर अपमान करना) के आरोपों से बरी कर दिया।

अतिरिक्त लोक अभियोजक वाई. एम. पाटिल ने अदालत को बताया कि ‘इवेंट मैनेजमेंट’ क्षेत्र में कार्यरत महिला की जनवरी 2022 में आरोपी से मित्रता हुई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने अप्रैल 2022 में विवाह का वादा कर महिला से शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उसने बताया कि वह पहले से विवाहित है, लेकिन दोबारा विवाह कर सकता है।

दोनों के बीच विवाद होने के बाद महिला की शिकायत पर मुंब्रा पुलिस ने तीन जून 2023 को मामला दर्ज किया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह सहमति से थे। उन्होंने यह भी बताया कि महिला ने पहले एक पूरक बयान देकर मामला वापस लेने की इच्छा जताई थी।

न्यायाधीश पवार ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि आरोपी और महिला के बीच एक वर्ष से अधिक समय तक संबंध रहे। यदि महिला को उसकी सहमति के बिना संबंध बनाए जाने की शिकायत थी, तो आरोपी के विवाहित होने की जानकारी मिलते ही उसे तत्काल जांच एजेंसी से संपर्क करना चाहिए था।

अदालत ने कहा कि इसके विपरीत, महिला ने आरोपी के साथ यौन संबंध जारी रखे, जिससे इस बात पर संदेह पैदा होता है कि संबंध उसकी सहमति के बिना बनाए गए थे या विवाह की आड़ में बनाए गए थे।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि महिला ने समय-समय पर अपने बयान बदले।

आदेश में कहा गया, ‘‘ शुरुआत में जब महिला को आरोपी के विवाहित होने की जानकारी मिली तो उसने उससे झगड़ा किया, लेकिन बाद में उसके साथ शारीरिक संबंध जारी रखे। जब उसे यह मालूम हुआ कि आरोपी विवाहित है, तब वह आगे ऐसे संबंधों से बच सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसलिए यह दावा कि संबंध विवाह के झूठे वादे पर या उसकी सहमति के बिना बनाए गए, संदेहास्पद है।’’

अदालत ने यह भी कहा कि चिकित्सीय साक्ष्य महिला के साथ मारपीट के आरोपों की पुष्टि नहीं करते।

भाषा शोभना दिलीप

दिलीप


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