ठाणे अदालत ने 2023 के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व सीमा शुल्क अधिकारी को बरी किया
ठाणे अदालत ने 2023 के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व सीमा शुल्क अधिकारी को बरी किया
ठाणे, सात अप्रैल (भाषा) ठाणे की एक विशेष अदालत ने सीमा शुल्क विभाग के एक पूर्व उपायुक्त को 2023 के भ्रष्टाचार मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोप पत्र सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक मंजूरी के बिना दायर किया गया था।
सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश डी एस देशमुख ने पूर्व सीमा शुल्क अधिकारी दिनेश देवराम फुलदिया को आरोपमुक्त करने के आवेदन को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि वैध मंजूरी प्राप्त होने के बाद अभियोजन पक्ष नया आरोपपत्र दाखिल करने के लिए स्वतंत्र है।
चार अप्रैल के आदेश की एक प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने छह जून, 2023 को जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस, न्हावा शेवा में तैनात फुलदिया और एक अन्य अधिकारी को अवैध रूप से माल के आयात की अनुमति देने के लिए एक बिचौलिए से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया।
मामले के विवरण के अनुसार, फुलदिया और एक अन्य अधिकारी ने एक बिचौलिए के माध्यम से सीमा शुल्क एजेंट को सीमा शुल्क अधिनियम के ‘निवास स्थान के स्थानांतरण’ खंड का फायदा उठाने में मदद की, जिसके अनुसार जो व्यक्ति दो साल से अधिक समय तक विदेश में रहा है, वह पांच लाख रुपये तक की छूट का दावा करके इस्तेमाल किए गए घरेलू सामान आयात कर सकता है।
फुलदिया पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा सात, सात ‘ए’, आठ और 12 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
फुलदिया ने सीआरपीसी की धारा 227 के तहत बरी होने की अपील दायर की, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि सीबीआई ने आवश्यक अनिवार्य मंजूरी के बिना आरोपपत्र दायर किया था, जो उनके अनुसार ‘कानून की दृष्टि से गलत’ था।
सीबीआई ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत अभियोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी अभी भी प्रतीक्षित है।
न्यायालय ने टिप्पणी की, ‘अधिनियम की धारा 19 के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी न्यायालय किसी लोक सेवक द्वारा कथित रूप से किए गए (धारा 7, 11, 13 और 15 के तहत) दंडनीय अपराध का संज्ञान पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं लेगा।’
अदालत ने कहा कि जब आरोपपत्र दाखिल किया गया था, तब सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभियुक्तों पर मुकदमा चलाने की कोई मंजूरी नहीं दी गई थी।
हालांकि, अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि दोषमुक्ति तकनीकी आधार पर थी, न कि साक्ष्यों की योग्यता के आधार पर।
भाषा तान्या वैभव
वैभव

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