कारगिल युद्ध में सशस्त्र बलों के साहस का इतिहास में कोई सानी नहीं : फडणवीस

कारगिल युद्ध में सशस्त्र बलों के साहस का इतिहास में कोई सानी नहीं : फडणवीस

कारगिल युद्ध में सशस्त्र बलों के साहस का इतिहास में कोई सानी नहीं : फडणवीस
Modified Date: July 27, 2026 / 06:41 pm IST
Published Date: July 27, 2026 6:41 pm IST

मुंबई, 27 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, उसका युद्धों के इतिहास में कोई सानी नहीं है।

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि जो समाज अपने वीरों को भूल जाता है, उसका वर्तमान तो होता है, लेकिन भविष्य नहीं होता।

उन्होंने कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह देश के सबसे महत्वपूर्ण युद्धों में से एक था, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने अतुल्य शौर्य का प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वत चोटियों पर दुश्मन के कब्जे के बावजूद भारतीय सेना ने बेहतरीन समन्वय और अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक-एक चौकी को फिर से अपने नियंत्रण में लिया और भारत को ऐतिहासिक विजय दिलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भीषण गोलीबारी, बमबारी और दुर्गम पर्वतीय इलाकों में भारतीय सैनिकों ने जिस वीरता का परिचय दिया, वह आज भी बेमिसाल है।

फडणवीस ने कहा, ‘‘कैप्टन सौरभ कालिया, कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय जैसे युवा अधिकारियों ने युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया। कई सैनिक ऐसे थे, जिनकी उम्र 25 वर्ष भी नहीं थी, लेकिन उन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। इतिहास उन्हें कभी नहीं भूलेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जो समाज अपने वीरों को भूल जाता है, उसका वर्तमान तो होता है, लेकिन भविष्य नहीं होता।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिक पैसों के लिए नहीं, बल्कि मातृभूमि की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए लड़ते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि शहीदों के परिजनों को यह महसूस हो कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

फडणवीस ने बताया कि वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा नीत राजग सरकार बनने के बाद, शहीद सैनिकों के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि हालांकि किसी भी राशि से सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान की भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन राज्य सरकार हमेशा शहीदों के परिवार के साथ खड़ी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल हथियार आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अब वह हथियारों का निर्यात भी कर रहा है।

इस अवसर पर, महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल सैन्य जीत की स्मृति नहीं, बल्कि देश के सैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान, अनुशासन और देशभक्ति का प्रतीक है।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल युद्ध में मिली जीत का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है।

शिंदे ने बताया कि कारगिल युद्ध की गाथा से आने वाली पीढ़ियों को अवगत कराने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कारगिल युद्ध स्मारक पर ‘लाइट एंड साउंड’ कार्यक्रम शुरू करने के वास्ते तीन करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और इस परियोजना पर कार्य जारी है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों का साहस और बलिदान आज भी प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करता है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में