अदालत ने जेल में बंद व्यक्ति का वजन 21 किलो कम होने पर संज्ञान लेते हुए उसे जमानत दी

अदालत ने जेल में बंद व्यक्ति का वजन 21 किलो कम होने पर संज्ञान लेते हुए उसे जमानत दी

अदालत ने जेल में बंद व्यक्ति का वजन 21 किलो कम होने पर संज्ञान लेते हुए उसे जमानत दी
Modified Date: September 9, 2026 / 08:33 pm IST
Published Date: September 9, 2026 8:33 pm IST

मुंबई, नौ सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने आपराधिक धमकी और भयादोहन के मामले में गिरफ्तार 59 साल के एक व्यक्ति को जमानत दे दी है। अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि गिरफ्तारी के बाद उसका वजन 21 किलोग्राम कम हो गया है, जिसे उसने “चिंताजनक” बताया।

जून में गिरफ्तार किए गए राधा मोहन मिश्रा ने चिकित्सा आधार पर जमानत के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव की पीठ ने सोमवार को कहा कि उन्हें इसमें कोई शक नहीं है कि मिश्रा के स्वास्थ्य की स्थिति “गंभीर” है और हिरासत के दौरान उनके चिकित्सा इतिहास का घटनाक्रम किसी भी सामान्य समझदार व्यक्ति को भी परेशान करने वाला है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि मिश्रा को उल्टी, चक्कर आना, बेहोशी, डिहाइड्रेशन और थकान जैसी समस्याएं हुईं।

अदालत ने कहा, “पहली नजर में यह पाया गया कि जेल में 48 दिनों के दौरान उनका वजन 21 किलोग्राम कम हो गया। सामान्य हालात में भी यह बात चिंताजनक और सेहत के लिए खतरनाक है, और इस मामले में तो आवेदक की मेडिकल स्थिति पहले से ही बहुत गंभीर है।”

पीठ ने कहा कि आरोपी को हिरासत या जेल के अस्पताल में ही रखने का निर्देश देने से उसकी सेहत और ज्यादा बिगड़ सकती है, और ऐसी स्थिति आ सकती है जहां से सुधार मुमकिन न हो।

न्यायमूर्ति जाधव ने कहा कि अदालत इस बात से वाकिफ है कि चिकित्सा आधार पर जमानत का सबसे ज्यादा गलत इस्तेमाल होता है, लेकिन “जमानत नियम है और जेल अपवाद” वाली पुरानी परंपरा को ऐसे स्पष्ट मामलों में सही ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि भले ही मिश्रा को कुछ ही महीनों के लिए जेल में रखा गया हो, लेकिन इससे उनकी सेहत पर काफी बुरा असर पड़ा है। उन्हें बड़े पैमाने पर पुनर्वास, देखभाल, खान-पान की निगरानी, ​​संक्रमण से बचाव और विशेषज्ञों से नियमित व निर्बाध मुलाकात की जरूरत है।

मिश्रा को राहत देते हुए अदालत ने उन्हें दो लाख रुपये का मुचलका भरने का आदेश दिया।

मिश्रा को जून में भारतीय न्याय संहिता और ‘महाराष्ट्र मानव बलि तथा अन्य अमानवीय, बुरी और अघोरी प्रथाओं व काले जादू की रोकथाम और उन्मूलन अधिनियम’ के तहत कई अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मिश्रा और उनके परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर एक दीवानी विवाद को लेकर अपने पड़ोसी परिवार का भयादोहन किया था और उन्हें धमकाया था।

भाषा प्रशांत माधव

माधव


लेखक के बारे में