राकांपा विधायक दल के नेता के रूप में सुनेत्रा पवार के चयन में कोई जल्दबाज़ी नहीं की गई: तटकरे

राकांपा विधायक दल के नेता के रूप में सुनेत्रा पवार के चयन में कोई जल्दबाज़ी नहीं की गई: तटकरे

राकांपा विधायक दल के नेता के रूप में सुनेत्रा पवार के चयन में कोई जल्दबाज़ी नहीं की गई: तटकरे
Modified Date: February 6, 2026 / 04:31 pm IST
Published Date: February 6, 2026 4:31 pm IST

मुंबई, छह फरवरी (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने सवाल किया है कि अजित पवार के निधन पर तीन दिन का शोक समाप्त होने के बाद सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुने जाने को जल्दबाजी क्यों कहा जाना चाहिए।

तटकरे ने एक मराठी समाचार चैनल से बात करते हुए कहा कि विधायक दल का नेता चुनना उनका अधिकार था। उन्होंने सवाल किया, ‘‘इसमें इतनी जल्दी कहां थी?’’

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार राकांपा के भी प्रमुख थे। गत 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती में एक विमान दुर्घटना में पवार के साथ ही चार अन्य व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। पवार का अंतिम संस्कार अगले दिन बारामती में किया गया गया था।

अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को 31 जनवरी को राकांपा का विधायक दल का नेता चुना गया था। सुनेत्रा पवार ने उसी दिन उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

तटकरे ने सवाल किया कि जब अजित पवार के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ था, तब राकांपा और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शप) के संभावित विलय के बारे में साक्षात्कार क्यों दिए जा रहे थे।

तटकरे ने किसी का नाम लिए बिना कहा, “विलय की बातचीत और राकांपा विधायक दल के नेता का चुनाव एक जैसा कैसे हो सकता है? हमने तीन दिन के शोक के बाद अपने नेता के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की।”

अजित पवार के निधन के बाद, शरद पवार और उनकी पार्टी के दूसरे नेताओं ने दावा किया था कि विलय की बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी और अजित पवार ने राकांपा के गुटों के फिर से एक होने की घोषणा के लिए 12 फरवरी की तारीख निर्धारित की थी।

तटकरे ने कहा कि जो लोग अजित पवार की विलय की इच्छा की बात कर रहे हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि दिवंगत नेता की 2019, 2021 और 2022 में भी भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने की इच्छा थी।

उन्होंने कहा, “लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई। अब हम जब भाजपा के नेतृत्व वाले राजग में हैं और आगे भी इसका हिस्सा बने रहेंगे। क्या विलय की योजना ऐसी थी कि हम राजग में बने रहें? अगर इस बारे में स्पष्टता मिलती है, तो मैं राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में इस पर टिप्पणी कर सकता हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि राकांपा अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखकर की जाएगी।

भाषा अमित वैभव

वैभव


लेखक के बारे में