अधिकरण ने सड़क हादसे के बाद लकवाग्रस्त हुए व्यक्ति को 1.06 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया

अधिकरण ने सड़क हादसे के बाद लकवाग्रस्त हुए व्यक्ति को 1.06 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया

अधिकरण ने सड़क हादसे के बाद लकवाग्रस्त हुए व्यक्ति को 1.06 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया
Modified Date: July 26, 2026 / 02:29 pm IST
Published Date: July 26, 2026 2:29 pm IST

पालघर, 26 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के पालघर में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने 2017 में मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे के बाद लकवाग्रस्त हुए 31 वर्षीय व्यक्ति को 1.06 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

पीड़ित ऋषभ विजयकुमार चोपड़ा होटल प्रबंधन के पूर्व छात्र हैं।

एमएसीटी के सदस्य ए. आर. रहाणे ने ऋषभ की कार को टक्कर मारने वाले ट्रक के मालिक और उसकी बीमा कंपनी ‘न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ को पीड़ित को संयुक्त रूप से 1.06 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। ट्रक के मालिक और उसकी बीमा कंपनी को इस राशि पर याचिका दाखिल किए जाने की तारीख से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने का निर्देश दिया गया है।

दावा याचिका के अनुसार, होटल प्रबंधन के छात्र ऋषभ 31 दिसंबर 2017 को अपने माता-पिता के साथ कार से गुजरात के वापी से मुंबई जा रहे थे। उस समय कार उनके पिता चला रहे थे। इसी दौरान हलोली गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी।

याचिका में कहा गया कि टक्कर के कारण कार तीन से चार बार पलटकर सड़क के दूसरी ओर जा गिरी।

हादसे में ऋषभ की मां की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। इससे वह स्थायी रूप से 70 प्रतिशत तक अशक्त हो गए और तब से बिस्तर पर हैं।

बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि हादसे में पीड़ित के पिता की लापरवाही थी। उसने ऋषभ की भविष्य में कमाई करने की क्षमता और इलाज पर हुए खर्च की राशि पर भी सवाल उठाया।

हालांकि, अधिकरण ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। उसने कहा कि पुलिस ने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के आरोप में केवल ट्रक चालक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

अधिकरण ने कहा, ‘‘आरोपपत्र दाखिल किया जाना प्रथमदृष्टया यह दर्शाता है कि ट्रक चालक वाहन को लापरवाही और तेज गति से चला रहा था।’’

अधिकरण ने प्रतिवादियों को पूरी राशि दो महीने के भीतर जमा करने का निर्देश दिया।

भाषा सिम्मी सुभाष

सुभाष


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