(फाइल फोटो सहित)
धुले (महाराष्ट्र), छह जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगामी नगर निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ ‘महायुति’ की 68 स्थानों पर निर्विरोध जीत के लिए निशाना साधने को लेकर मंगलवार को विपक्षी दलों पर हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अगर विपक्षी दलों को झटका लगा तो वह क्या कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने उत्तर महाराष्ट्र के धुले में एक रैली में प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘तुमको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं?”
वह 15 जनवरी को राज्य के 29 नगर निगमों के चुनावों के लिए रैली को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने धुले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चार पार्षदों के निर्विरोध निर्वाचित होने पर मतदाताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ‘हम इस समर्थन को तहे दिल से स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘अब तक 35 लोकसभा सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जिनमें से 33 कांग्रेस शासन के दौरान निर्वाचित हुए थे।’
इस मुद्दे पर विपक्ष की आलोचना पर सवाल उठाते हुए फडणवीस ने कहा, ‘‘अगर आपके कार्यकाल में निर्विरोध चुनाव होते हैं, तो लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं होता, लेकिन अगर ऐसा हमारे समय में होता है, तो लोकतंत्र खतरे में है।’
धुले को महाराष्ट्र का प्रवेश द्वार बताते हुए फडणवीस ने कहा कि इस शहर के एक तरफ गुजरात और दूसरी तरफ मध्यप्रदेश स्थित है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘2003 में निगम के गठन के बाद भाजपा के सत्ता में आने तक धुले में कोई विकास नहीं हुआ था।’
निकाय चुनावों से पहले ‘महायुति’ उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत का मुद्दा सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय में पहुंचा, जहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक नेता ने 68 सीटों पर परिणामों की घोषणा पर रोक लगाने और दबाव के कारण जबरन कराए गए ‘सामूहिक नाम वापसी’ की अदालत की निगरानी में जांच कराने का आग्रह किया।
इससे एक दिन पहले, शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य निर्वाचन आयोग से नगर निकायों के 68 वार्ड के परिणामों को यह कहते हुए रद्द करने का आग्रह किया था कि निर्विरोध जीत प्रभावी रूप से ‘जेन जेड’ और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करती है।
‘जेन जेड’ वे युवा हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ।
प्रदेश कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने भी सत्तारूढ़ गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाजपा नीत ‘महायुति’ की सत्ता की लालसा ‘लोकतंत्र को निगलने’ की हद तक पहुंच गई है।
भाषा आशीष प्रशांत
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