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Aaj Ka Panchang 08 March 2026: नई दिल्ली: होली के रंग अभी फीके भी नहीं पड़े कि आज देशभर में रंगों का एक और उत्सव मनाया जा रहा है। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि पर मनाई जाने वाली रंग पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व खास माना जाता है। इस दिन लोग रंग-गुलाल के साथ अपने आराध्य देवताओं की पूजा करते हैं और कई जगहों पर मंदिरों में विशेष रंगोत्सव का आयोजन किया जाता है। कई क्षेत्रों में इस पर्व को देव होली या कृष्ण पंचमी भी कहा जाता है। ऐसे में ज्योतिषाचार्य आनंद सागर पाठक के अनुसार आइए पंचांग के जरिए जानते हैं कि 8 मार्च 2026 को कौन-कौन से शुभ मुहूर्त और योग बन रहे हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज संवत 2082, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है, जो रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। आज का दिन रविवार है और पूरे दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं। आज ध्रुव योग शाम 7 बजकर 4 मिनट तक रहेगा, जिसे स्थिरता और शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। वहीं करण की बात करें तो कौलव करण सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद तैतिल करण रात 9 बजकर 10 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति भी आज के दिन को खास बना रही है। आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 39 मिनट पर हुआ है और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। वहीं चंद्रोदय रात 11 बजकर 8 मिनट पर और चन्द्रास्त सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर होगा। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार आज कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और शुभ शुरुआत करना लाभकारी माना जाता है।
आज के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसे दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। इसके अलावा अमृत काल 9 मार्च को सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। वहीं दिन में कुछ समय ऐसे भी हैं जिन्हें अशुभ माना गया है। आज राहुकाल शाम 4 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट तक, गुलिकाल दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से शाम 4 बजकर 57 मिनट तक और यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। इस दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
नक्षत्र की दृष्टि से भी आज का दिन महत्वपूर्ण है। आज चंद्रदेव स्वाती नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक प्रभावी रहेगा। स्वाती नक्षत्र को स्वतंत्रता, बुद्धिमत्ता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी राहु हैं, जबकि राशि स्वामी शुक्रदेव माने जाते हैं और इसके देवता वायुदेव हैं। इस नक्षत्र का प्रतीक हवा में झूलता हुआ नया अंकुर माना जाता है, जो लचीलापन और नई शुरुआत का संकेत देता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार रंग पंचमी होली के पांचवें दिन मनाई जाती है और कई स्थानों पर इसी दिन होली उत्सव का समापन माना जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के रंग-गुलाल के साथ होली खेलने की स्मृति में मनाया जाता है। विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में इस दिन भव्य रंगोत्सव आयोजित किए जाते हैं, जहां भक्त भगवान को गुलाल अर्पित कर उत्सव मनाते हैं।
मध्य प्रदेश के उज्जैन सहित कई शहरों में रंग पंचमी का उत्सव बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। यहां हुरियारों की टोलियां सड़कों पर निकलती हैं और नगर निगम के वाहनों से सुगंधित रंगों की बौछार की जाती है। मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई जाती हैं और कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। इस तरह रंग पंचमी न सिर्फ धार्मिक आस्था बल्कि सामाजिक उत्साह और रंगों की खुशियों का प्रतीक बन जाती है।