कायर कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करूंगा: न्यायाधीश
कायर कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करूंगा: न्यायाधीश
मुजफ्फरनगर (उप्र), आठ सितंबर (भाषा) मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने दहेज हत्या के एक मामले में सोमवार को मृत्युदंड का फैसला सुनाते हुए कहा कि वह ‘‘कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे।’’
पिछले चार माह में उनके द्वारा सुनाया गया यह 23वां मृत्युदंड है।
दहेज की मांग को लेकर पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी एक व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए त्वरित अदालत के न्यायाधीश ने कहा कि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए ‘‘माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों के दबाव में’’ नहीं आएंगे।
न्यायाधीश दिवाकर ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें केवल ईश्वर से डरना सिखाया है। उन्होंने कहा कि यदि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करते हुए ‘‘बाहुबलियों, माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों’’ से डर जाएंगे तो न्यायपालिका में जनता का विश्वास समाप्त हो जाएगा।
अपने फैसले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि वह ‘‘कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे’’ और जब तक अपने सिद्धांतों का पालन कर सकते हैं, तब तक सेवा करते रहेंगे।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्हें माफियाओं और अपराधियों से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माफियाओं और अपराधियों को लाभ पहुंचाने के लिए उनकी अदालत से लगभग 100 गंभीर मामलों को वापस ले लिया गया है।
ऐसा समझा जाता है कि दिवाकर ने मुजफ्फरनगर में अपनी सुरक्षा कम किए जाने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है।
शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, सोमवार के मामले में न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने अभियुक्त नदीम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 504 के तहत दोषी ठहराया और उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह मामला 23 जुलाई 2018 को शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर नदीम द्वारा अपनी पत्नी शहजादी (23) को कथित तौर जला देने से संबंधित है।
शहजादी को गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई थी।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मृत्यु से पहले दर्ज कराए गए बयान में शहजादी ने आरोप लगाया था कि नदीम ने उसे जलाया था।
उन्होंने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह मुकर गए, लेकिन अदालत ने शहजादी के मृत्युपूर्व बयान के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने पिछले चार महीनों में 11 मामलों में 23 लोगों को मृत्युदंड दिया है।
इससे पहले अगस्त में, दिवाकर के समक्ष लंबित हत्या के लगभग 100 मामलों को एक प्रशासनिक आदेश के माध्यम से जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा था कि मामलों का स्थानांतरण वकीलों और वादियों के बीच त्वरित अदालत द्वारा मृत्युदंड दिए जाने की आशंका के बीच हुआ।
भाषा सं जफर खारी मनीषा
मनीषा
लेखक के बारे में
Web Title: कायर कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करूंगा: न्यायाधीश
MUZAFFARNAGAR
और भी पढ़ें ›
Lucknow Murder News Today: मां ने लिंग परिवर्तन से कराने से किया इनकार, तो नाबालिग बेटे ने उठाया खौफनाक कदम, मामला जानकर पुलिस भी रह गई दंग
02 Oct 2026 | 8:55 am
Vande Bharat: UP का रण.. किसके ब्राह्मण? MLC चुनाव में 11 में 5 ब्राह्मण चेहरे, क्या ये 2027 से पहले सोशल इंजीनियरिंग की बड़ी तैयारी है?
01 Oct 2026 | 11:57 pmयूपी रेरा ने 11 रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी मंजूरी
01 Oct 2026 | 11:36 pmहिरासत में लिए जाने के समय से शुरू होती है मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की समय-सीमा : अदालत
01 Oct 2026 | 11:29 pmगाजियाबाद : इंदिरापुरम के गोदाम में भीषण आग, कोई हताहत नहीं
01 Oct 2026 | 11:11 pmमहिलाओं से मारपीट : उप जिलाधिकारी समेत 10 अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आरोप
01 Oct 2026 | 11:05 pmएएमयू में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन 11वें दिन भी जारी
01 Oct 2026 | 10:22 pmगाजीपुर में हथियार तस्करी के आरोप में तीन लोग गिरफ्तार, 19 तमंचे बरामद
01 Oct 2026 | 10:06 pm