Raipur Sahitya Utsav : रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ सत्र बना वैचारिक मंथन का केंद्र, प्रख्यात विचारक राम माधव के तर्कों से प्रभावित हुए श्रोता
Raipur Sahitya Utsav 2026: उत्सव के विभिन्न सत्रों के बीच ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया, जिसने बुद्धिजीवियों, युवाओं और श्रोताओं …

Raipur Sahitya Utsav, image source: cgdpr
- ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र
- जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायु : राम माधव
- भविष्य की प्रगति के संतुलन से भरे वैचारिक संवाद
Raipur news: रायपुर के गौरवशाली आयोजन रायपुर साहित्य उत्सव ने अपनी भव्यता और वैचारिक गंभीरता से प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के साहित्यिक और बौद्धिक जगत में एक सशक्त पहचान बनाई है। (Raipur Sahitya Utsav Ram madhav speech) उत्सव के विभिन्न सत्रों के बीच ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया, जिसने बुद्धिजीवियों, युवाओं और श्रोताओं को गहन विचार के लिए प्रेरित किया।
जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायु : राम माधव
इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रख्यात विचारक एवं लेखक राम माधव रहे। उन्होंने अपने संतुलित और तार्किक वक्तव्य के माध्यम से भारतीय चेतना को आधुनिक संदर्भों में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। (Raipur Sahitya Utsav Ram madhav speech) राम माधव ने कहा कि किसी भी जीवंत राष्ट्र के लिए उसका बौद्धिक विमर्श उसकी प्राणवायु होता है। उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और वैश्विक राजनीति से जोड़ते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत का चिंतन न केवल मौलिक है, बल्कि तार्किक कसौटी पर भी पूरी तरह खरा उतरता है।
राम माधव ने इस भ्रांति को भी सशक्त तर्कों के साथ खंडित किया कि बौद्धिकता केवल पश्चिमी दृष्टिकोण तक सीमित है। (Raipur Sahitya Utsav Ram madhav speech) उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्र चिंतन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ-साथ आधुनिक यथार्थ को समझने की क्षमता भी रखता है। संवाद के दौरान उनके तर्कों की श्रृंखला ने विद्वानों के साथ-साथ युवाओं और सामान्य श्रोताओं को भी विशेष रूप से प्रभावित किया।
भविष्य की प्रगति के संतुलन से भरे वैचारिक संवाद
सत्र के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने भी अपने विचार साझा किए, जिससे पूरा वातावरण परंपरा और भविष्य की प्रगति के संतुलन से भरे वैचारिक संवाद में बदल गया। (Raipur Sahitya Utsav Ram madhav speech) सत्र के समापन पर यह संदेश उभरकर सामने आया कि असहमति भी तभी सार्थक है, जब वह तर्क और मर्यादा के दायरे में हो।
रायपुर साहित्य उत्सव का यह सत्र केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि सकारात्मक, रचनात्मक और आत्मबोध से जुड़े बौद्धिक विमर्श की नई संस्कृति का प्रतीक बनकर सामने आया। इस आयोजन ने यह भी सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की माटी में लोक संस्कृति के साथ-साथ उच्चस्तरीय वैचारिक मंथन के लिए भी एक सशक्त और उर्वर भूमि मौजूद है।
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लेखक के बारे में
डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगोष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com
और भी पढ़ें...Web Title: The session "India's Intellectual Discourse" at the Raipur Literature Festival became a center of thoughtful discussion
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