Politics On Ram Mandir : राम पर युद्ध जारी..कौन किस पर भारी? चरम पर है सियासी रण
Politics On Ram Mandir : जब देश में चहुंओर राम-नाम की चर्चा है, तब इस अद्भुत माहौल में राम नाम पर सियासी रण भी चरम पर है।
Politics On Ram Mandir
रायपुर/भोपाल : Politics On Ram Mandir : जब देश में चहुंओर राम-नाम की चर्चा है, तब इस अद्भुत माहौल में राम नाम पर सियासी रण भी चरम पर है। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होने का न्योता ठुकराने के फैसले पर बीजेपी, कांग्रेस को चौतरफा घेर रही है। राम के ननिहाल यानि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। CM साय ने कहा कि कांग्रेस की मति मारी गई है, कांग्रेस ने सिद्ध कर दिया है कि वो चुनावी हिंदू बनते हैं। वहीं मंत्री केदार कश्यप ने मांग की कांग्रेस नेता प्रोटोकॉल जारी कर बताएं कि 22 जनवरी कौन-कहां रहेगा। जवाब में पीसीसी चीफ ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि, BJP ने भगवान राम को हाईजैक कर लिया है,बीजेपी तो इन दिनों शंकराचार्य को भी विरोधी बताने में लगी है।
Politics On Ram Mandir : वैसे, आलाकमान द्वारा प्राणप्रतिष्ठा का न्योता ठुकराने के फैसले को कई कांग्रेसी भी पचा नहीं पा रहे हैं। मध्यप्रदेश के कई नेताओं ने इसके खिलाफ पार्टी छोड़ने जैसा कदम भी उठाया है। MP के CM डॉ मोहन यादव ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि भगवान उन्हें सद्बुद्धि प्रदान करें। प्रेम से निमंत्रण देने पर भी प्रश्न उठाते और ठुकराने वालों से अभागा और कौन होगा। निशाना सीधे आलाकमान पर है सो पार्टी के वरिष्ठ नेता सफाई की मुद्रा में हैं। पीएल पुनिया ने कहा कि जिस कांग्रेस नेता-कार्यकर्ता को राम मंदिर जाना हो वो जा सकते हैं, राहुल गांधी या अध्यक्ष ने किसी को मना नहीं किया है ।
एक तरफ बयानों के तीर हैं तो दूसरी तरफ एक से बढ़कर एक आयोजनों की होड़ भी है। मध्यप्रदेश में 22 जनवरी को सभी मंदिरों-नदियों में दीपदान होगा, प्रदेश की धर्म नगरी-उज्जैन,चित्रकूट,ओरछा,देवास समेत,रतलाम,सीहोर में कई विशेष आयोजन होंगे। CM मोहन यादव स्वयं राजा राम की नगरी ओरछा में रहेंगे। इधर, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 22 जनवरी को उत्सव मनाएगी। कांग्रेस ने सभी जिलों में हनुमान चालीसा का पाठ रखा है। कांग्रेसी चंदखुरी में सुंदरकांड का महापाठ भी करेंगे। इसके अलावा UP,MP,छत्तीसगढ़,राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में 22 जनवरी को ड्राई-डे होगा। प्रदेश सरकारों ने हाफ या फुल डे अवकाश भी घोषित किया गया है। सबसे बड़ा सवाल है क्या प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में ना जाने का फैसला कांग्रेस की ऐतिहासित चूक साबित होगा, क्या कांग्रेसियों की सफाई देश की जनता को स्वीकार्य है?

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