Krishna Janmashtami 2026../Image Credit: ScreenGrab / Google / @Canva
Krishna Janmashtami 2026: वृंदावन की पावन भूमि पर स्थित “श्री बांके बिहारी मंदिर“ केवल एक धार्मिक जगह नहीं है, बल्कि साक्षात् दिव्य प्रेम, सच्ची भक्ति और चमत्कारों का साक्षात् केंद्र है। माना जाता है कि इस यहाँ कदम रखते ही भक्त की ज़िंदगी बदल जाती है। लेकिन, बहुत से भक्तों के मन में यह सवाल आता है कि कृष्ण जी का नाम ‘बांके बिहारी’ क्यों पड़ा? तो आइए जानते हैं इसके पीछे की बेहद सुंदर वजह..
भगवान के इस नाम के पीछे भी सुन्दर और गहरा रहस्य छिपा है ‘बांके’ इसका अर्थ होता है “तीन जगहों से टेढ़ा” यानी जो तीन जगह से मुड़ा हो। भगवान कृष्ण जब बांसुरी बजाते हैं, तो उसकी त्रिभंगी मुद्रा (कमर, गर्दन और पैर एक ख़ास कोण में मुड़े होते हैं) होते हैं, जिसे ‘बांके’ कहा जाता है। ‘बिहारी’ का अर्थ है वृन्दावन की कुंज गलियों में प्रेम से घूमने और आनंदित होने वाले परमेश्वर।
बांके बिहारी जी की दर्शन पाना किसी भक्त के लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य मना जाता है, क्योंकि उनके केवल एक पल के दर्शन मात्र से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पाप, दुःख और मानसिक कष्ट पलभर में दूर हो जाते हैं। ठाकुर जी का विग्रह इतना करुणामयी और जीवंत है कि यहाँ आने वाला हर भक्त अपनी सुध-बुध खोकर पूरी तरह कृष्ण प्रेम के रंग में रंग जाता है।
बांके बिहारी जी के दर्शन के साथ-साथ उनकी आरती का आध्यात्मिक महत्व भी अद्भुत है, क्योंकि इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। असल में आरती किसी भी पूजा की आत्मा होती है, जिससे भक्त भगवान के प्रति अपना प्यार और आदर जताते हैं। माना जाता है कि आरती के बाद उसकी लौ को अपने मस्तक पर धारण करने से उसकी सभी मनोकामनाएँ आवश्य पूरी होती हैं और भक्त को पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आईये मिलकर गाएं श्री बाँकेबिहारी की यह सुन्दर आरती:
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
कुन्जबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे।
प्यारी बंशी मेरो मन मोहे।
देखि छवि बलिहारी जाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी।
जिसने सारी दुनिया तारी।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
दास अनाथ के नाथ आप हो।
दुःख सुख जीवन प्यारे साथ हो।
हरि चरणों में शीश नवाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
श्री हरि दास के प्यारे तुम हो।
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देखि युगल छवि बलि-बलि जाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ।
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।