Masik Shivratri 2026: ये 48 मिनट बदल सकती हैं आपकी किस्मत! आज चैत्र मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा और शुभ मुहूर्त जानकर ऐसे प्राप्त करें दिव्य आशीर्वाद!

Masik Shivratri 2026: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का बहुत महत्व होता है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Masik Shivratri 2026: ये 48 मिनट बदल सकती हैं आपकी किस्मत! आज चैत्र मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा और शुभ मुहूर्त जानकर ऐसे प्राप्त करें दिव्य आशीर्वाद!

(Masik Shivratri 2026/ Image Credit: Pixabay)

Modified Date: March 17, 2026 / 12:50 pm IST
Published Date: March 17, 2026 11:54 am IST
HIGHLIGHTS
  • चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 मार्च 2026 को मनाई जा रही है।
  • पूजा का सबसे शुभ समय निशिता काल 12:07 AM से 12:55 AM तक है।
  • मासिक शिवरात्रि पर व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

Masik Shivratri 2026 Date: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। यह हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है और भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। खासकर चैत्र माह की मासिक शिवरात्रि भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

चैत्र मासिक शिवरात्रि 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 मार्च को शुरू होगी। यह तिथि सुबह 09:23 बजे से शुरू होकर अगले दिन 18 मार्च सुबह 08:25 बजे तक रहेगी। भगवान शिव की पूजा रात्रि में करने को अधिक फलदायी माना जाता है, इसलिए इस दिन रात में विशेष आराधना का महत्व है।

मासिक शिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त

मासिक शिवरात्रि में निशिता काल को पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस बार निशिता काल का मुख्य मुहूर्त 17 मार्च की देर रात 12:07 AM से 12:55 AM तक रहेगा। कुल अवधि लगभग 48 मिनट की है, जिसे बेहद शुभ माना जा रहा है। इस समय भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।

पूजा की विधि

मासिक शिवरात्रि पर भक्त व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करते हैं। पूजा में घर के मंदिर या शिवालय में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें। भगवान शिव को भांग, फल और मिठाई का भोग लगाएं। अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। रात के समय निशिता काल में फिर से अभिषेक और आरती करें।

धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि पर पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पापों का नाश होता है। यह व्रत भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक होता है। कुंवारे लोगों के लिए यह व्रत योग्य जीवनसाथी प्राप्त करने में भी मददगार माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन जलाभिषेक करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।