Namokar Mantra: कुत्ते ने सुना मंत्र.. बन गया ‘स्वर्ग का प्रतापी देव’! इस तरह धुल गए जन्मों जन्म के पाप, पढ़ें णमोकार मंत्र की चमत्कारिक कहानी!

Namokar Mantra: क्या आप जानते हैं 'बिना किसी मंदिर, बिना किसी मूर्ति के', मौत के आखिरी पलों में 'णमोकार मंत्र' सुनकर कैसे पलट गया एक कुत्ते का भाग्य? आइये जानते हैं वो सत्य घटना, जिसने सबको झकझोर दिया..

Namokar Mantra: कुत्ते ने सुना मंत्र.. बन गया ‘स्वर्ग का प्रतापी देव’! इस तरह धुल गए जन्मों जन्म के पाप, पढ़ें णमोकार मंत्र की चमत्कारिक कहानी!

Namokar Mantra/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

Modified Date: September 5, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: September 5, 2026 5:53 pm IST
HIGHLIGHTS
  • Namokar Mantra: क्या कोई पशु भी स्वर्ग जा सकता है?
  • 'णमोकार मंत्र' का वो रोंगटे खड़े कर देने वाला चमत्कार!
  • जानिए क्यों 'णमोकार मंत्र' में है ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति!

Namokar Mantra ka Chamatkar: जैन पुराणों के अनुसार,णमोकार महामंत्र की महिमा इतनी महान है कि यह न सिर्फ इंसानों का बल्कि पशु-पक्षियों का भी कल्याण कर सकता है। इस मंत्र के चमत्कार का सबसे प्रसिद्द उदाहरण कुमार जीवंधर’ और ‘एक मरते हुए कुत्ते‘ की कहानी है, जो हमें सिखाती है कि मृत्यु के समय मन के विचार कितने मायने रखते हैं। आइए, इस चमत्कारी कहानी पर आगे बढ़ने से पहले यह जान लेते हैं कि णमोकार मंत्र (नवकार मंत्र) क्या है?

णमोकार मंत्र (नवकार मंत्र) जैन धर्म का सबसे पवित्र, अनादि और सार्वभौमिक मंत्र है, जो किसी व्यक्ति विशेष की पूजा नहीं करता, बल्कि ‘पंच परमेष्ठी’ (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु) के सर्वोच्च गुणों को नमन करता है। रोज़ाना इस अद्भुत मंत्र का जाप करने से मन को गहरी शांति मिलती है, सारी नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति के भीतर विनम्रता और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।

Power of Navkar Mantra: ‘णमोकार मंत्र’ को क्यों माना गया ‘विश्व मंत्र‘?

‘णमोकार मंत्र’ को जैन दर्शन में ‘विश्व-मंत्र’ माना गया है, क्योंकि इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कोई भी इंसान, कभी भी और किसी भी स्थान पर पढ़ सकता है। आइए, अब हम कुमार ‘जीवंधर’ और ‘एक मरते हुए कुत्ते’ की उस प्रसिद्ध और चमत्कारी कहानी की तरफ बढ़ते हैं..

णमोकार मंत्र‘ सुनकर एक मरते हुए कुत्ते ने कैसे पाई ‘देवगति’? एक अद्भुत कहानी..

बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में एक बेसहारा कुत्ता रहता था। एक दिन किसी क्रूर व्यक्ति ने बिना किसी बात से उस कुत्ते को लाठी-डंडों से इतनी बेरहमी से पीटा कि वह लहूलुहान होकर सड़क के किनारे गिर गया और दर्द से बुरी तरह तड़पने लगा। उसकी चोटें इतनी गहरी थी कि उसका बचना नामुमकिन था। वह दर्द, गुस्से और बदले की भावना से भरा अपनी अंतिम सांसें ले रहा था।

जैन धर्म के अनुसार, यदि कोई जीव मृत्यु के समय अत्याधिक क्रोध, गहरे दुःख या प्रतिशोध के भाव में होता है, तो उसकी दुर्गति होती है और वह मरने के बाद नरक या पशु योनि जैसी निचली गतियों में जन्म लेता है। इस मरते हुए कुत्ते के साथ भी ऐसा ही होने वाला था। तभी भाग्यवश वहाँ से राजकुमार जीवंधर गुजरे, जो स्वभाव से बहुत दयालु और धार्मिक थे।

लहूलुहान कुत्ते को दर्द से कराहते देख उन्हें बहुत दुख हुआ। वे समझ गए कि अब इलाज करने का वक्त नहीं बचा है और कुत्ता अपनी आखिरी सांसें ले रहा हैं। कुमार जीवंधर ने मन में विचार किया कि इस कुत्ते के शरीर को बचाना तो अब नामुमकिन है, लेकिन इसकी आत्मा को दुर्गति से ज़रूर बचाया जा सकता है। वे तुरंत उस घायल कुत्ते के पास जमीन पर ही बैठ गए।

Jain Namokar Mantra Chamatkar: जब एक मरते हुए कुत्ते की कानों में गूंजा ‘णमोकार मंत्र’..

राजकुमार जीवंधर ने बड़े प्यार से कुत्ते के सिर पर हाथ फेरा और उसके कान के पास झुककर अत्यंत शांत, मधुर और पवित्र आवाज़ में ‘णमोकार मंत्र‘ का पाठ शुरू कर दिया। जैसे ही मंत्र के शब्द उस तड़पते हुए कुत्ते के कानों में पहुँचे, वहाँ एक अद्भुत चमत्कार हुआ। मंत्र के प्रभाव से कुत्ते का ध्यान अपने दर्द से हट गया। उसका गुस्सा पूरी तरह शांत हो गया और अपने मारने वाले के प्रति भी उसके मन में कोई नफ़रत नहीं रही। कुत्ते का मन पूरी तरह पवित्र और शांत हो गया। उसने अपनी आँखें बंद कीं और भगवान का नाम सुनते-सुनते बहुत ही शांति से दम तोड़ दिया।

मृत्यु के अंतिम क्षणों में साक्षात महामंत्र की ध्वनि सुनने और मन को परम शांत रखने के कारण, उस कुत्ते के जन्मों-जन्मों के पाप कर्म भस्म हो गए। इस बड़े पुण्य के असर से उसने सीधे देवगति पाई और अगले जन्म में वह स्वर्ग का एक महान देव बना, जिसका नाम ‘सुदर्शन यक्षेन्द्र’ था। जब उस देव ने अपनी दिव्य दृष्टि से अपने पिछले जन्म को देखा, तो उसे एहसास हुआ कि एक बेसहारा कुत्ते से देव बनने का यह रास्ता सिर्फ कुमार जीवंधर और णमोकार मंत्र के कारण ही खुला है। वह देव तुरंत धरती पर आया और कुमार जीवंधर के पैरों में झुककर उनका धन्यवाद किया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि ‘णमोकार मंत्र’ में इतनी असीम शक्ति है कि यह किसी भी जीव की सोई हुई किस्मत को चमका सकता है।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

इन्हें भी पढ़ें:


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

Swati Shah, Since 2023, I have been working as an Executive Assistant at IBC24, No.1 News Channel in Madhya Pradesh & Chhattisgarh. I completed my B.Com in 2008 from Pandit Ravishankar Shukla University, Raipur (C.G). While working as an Executive Assistant, I enjoy posting videos in the digital department.