Paryushan Parv 2026: कब से शुरू हो रहा है जैन धर्म का यह ख़ास त्यौहार? जानें आखिर क्यों ‘पर्यूषण महापर्व’ है बाकी त्योहारों से बिल्कुल अलग?
Paryushan Parv 2026: जैन धर्म का सबसे पवित्र उत्सव 'पर्यूषण पर्व' वर्ष 2026 में 8 सितंबर (मंगलवार) से शुरू होने वाला है। कई लोगों के मन में आता है कि आखिर इस पर्व को 'पर्वाधिराज' यानी 'पर्वों का राजा' क्यों कहा जाता है और कितने दिनों तक चलता है यह महापर्व? आइये जानते हैं इस पावन पर्व से जुडी संपूर्ण जानकारी..
Paryushan Parv 2026/Image Credit: ScreenGrab / Google / @Canva
- कब से शुरू हो रहा है 'पर्यूषण महापर्व 2026'?
- पर्यूषण महापर्व क्यों है सभी त्योहारों से अलग?
Paryushan Parv 2026: जैन धर्म का महापर्व ‘पर्यूषण‘ वर्ष 2026 में 8 सितंबर (मंगलवार) से शुरू होने जा रहा है। 25 सितंबर तक चलने वाले इस आस्था के उत्सव में ‘श्वेतांबर जैन समाज‘ 8 सितंबर से 15 सितंबर 2026 तक और ‘दिगंबर जैन समाज‘ 15 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक अपनी आध्यात्मिक साधना करेंगे।
Jain Paryushan Parv 2026: अंतरात्मा की शुद्धि का अनूठा उत्सव!
मानव जीवन में त्योहारों का बहुत ही बड़ा महत्व है। आमतौर पर जहाँ दुनिया के बाकी त्योहार बाहरी चकाचौंध, नाच-गाने, मौज-मस्ती, नए कड़पे और मिठाइयों से जुड़े होते हैं। वहीं जैन धर्म का ‘पर्यूषण पर्व‘ इन सब से बिल्कुल जुदा है। यह बाहरी दिखावे का नहीं, बल्कि अपनी अंतरात्मा को संवारने का उत्सव है। इसलिए, इसे जैन धर्म में ‘पर्वाधिराज’ यानी सभी ‘पर्वों का राजा’ कहा जाता है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जैसे हम अपने घर की रोज़ साफ़ सफाई करते हैं और साल में एक बार दिवाली पर दीप जलाकर घर का कोना-कोना चमकाते हैं, ठीक उसी तरह हमें साल में एक बार पर्यूषण के दौरान अपनी अंतरात्मा पर जमी कर्मों की धूल को साफ़ करना चाहिए।
क्या होता है “पर्यूषण” और इसका महत्व!
‘पर्यूषण’ का मतलब होता है ‘अपनी आत्मा के निकट निवास करना। यह ‘परि’ (चारों ओर से) और ‘उषण’ (निवास करना) शब्दों से मिलकर बना है। यह पर्व इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि संसार में रहते हुए हम सालभर सांसारिक उलझनों में फंसे रहते हैं, जिससे जाने-अनजाने हमारी आत्मा पर गुस्सा, लालच और स्वार्थ का मैल जम जाता है। पर्यूषण का यह समय हमें अपनी आत्मा को झांकने का मौका देता है ताकि हम अपनी कमियों को सुधार सकें और सच्चे सुख यानी मोक्ष की तरफ कदम बढ़ा सकें।
Paryushan Mahaparv 2026: कितने दिनों का होता है ‘पर्यूषण महापर्व’?
जैन धर्म की दोनों परम्पराओं में इस पर्व को मनाने की अवधि भले ही अलग हो, किन्तु इसके पीछे की आध्यात्मिक भावना और उद्देश्य एक ही है “आत्म-कल्याण” ।
जहाँ श्वेताम्बर जैन समाज में यह 8 दिनों का कठिन आत्म साधना का पर्व हैं जिसमें मुख्य रूप से ‘कल्पसूत्र’ नाम के महाग्रंथ के श्रवण और स्वाध्याय को महत्ता दी जाती है। वहीं दिगंबर जैन समाज में इसे 10 दिनों तक ‘दश लक्षण पर्व’ के रूप में मनाया जाता है। इन दस दिनों में रोज़ आत्मा के एक-एक उत्तम धर्म की पूजा, अर्चना और विशेष चिंतन किया जाता है।
तप, साधना और आत्म नियंत्रण के दिन!
पर्यूषण पर्व के दिनों में सभी लोग अपनी क्षमता के अनुसार व्रत और तप रखते हैं, जैसे उपवास, एकाशना या आयंबिल। कुछ श्रद्धालु दिन में एक बार खाते हैं, तो कुछ पूरे दिन बिना कुछ खाए व्रत रखते हैं।
हालाँकि, पर्यूषण का असली मतलब सिर्फ भूखे रहना नहीं है, बल्कि अपने मन, बातों और कर्मों को पवित्र बनाना है। इन दिनों लोग अपने गुस्से, लालच और स्वार्थ को छोड़ने की पूरी कोशिश करते हैं। इस दौरान भगवान की भक्ति, धार्मिक किताबों को पढ़ना, ध्यान लगाना और महाराज साहब के प्रवचन सुनना भी बहुत जरूरी माना जाता है।
Jain Festival: क्षमा और करुणा का सबसे बड़ा दिन “संवत्सरी”!
श्वेताम्बर समाज में पर्यूषण के आखिरी दिन ‘संवत्सरी’ मनाई जाती है। यह पूरा दिन जैन इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण और पावन माना गया है। संवत्सरी को “क्षमावाणी का दिन” भी कहते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि इसे जाने-अनजाने में की गयी गलती की क्षमा मांगने का विशेष अवसर माना जाता है।
संवत्सरी के दिन जैन धर्म का हर व्यक्ति अपने सारे अहंकार और गुस्से को छोड़कर, छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का भेद भूलकर, अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और यहाँ तक कि अपने दुश्मनों से भी हाथ जोड़कर और गले मिलकर “मिच्छामि दुक्कड़म” कहकर सच्चे दिल से माफी मांगता है, जिसका भाव है मेरे द्वारा मन, वचन या कर्म से जाने-अनजाने में कोई भूल हुई तो मुझे क्षमा करें।
Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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