Sawan Shivratri 2026 Date: कब है सावन की शिवरात्रि? इस दिन क्यों उमड़ती है शिव भक्तों की भारी भीड़, महादेव से जुड़ा ऐसा रहस्य जिसे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान!
Sawan Shivratri 2026 Date: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान पड़ने वाली सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। भक्त इस दिन जलाभिषेक और पूजा करते हैं। आइए जानते हैं कि सावन शिवरात्रि की सही तारीख, शुभ समय और इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं।
(Sawan Shivratri 2026 Date/ Image Credit: AI-generated)
- 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि।
- सावन महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास।
- जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का है विशेष महत्व।
नई दिल्ली: Sawan Shivratri 2026 Date: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त भोलेनाथ की पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। लेकिन सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि का महत्व (Sawan Shivratri 2026 Date) विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
सावन शिवरात्रि 2026 की तारीख और शुभ समय
सावन शिवरात्रि हर साल सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (Sawan Shivratri 2026 Date) को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
शिव पूजा और जलाभिषेक की खास परंपरा
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करने की परंपरा है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग का अभिषेक कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं। खासतौर पर कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
समुद्र मंथन से जुड़ी है पौराणिक कथा
सावन शिवरात्रि से जुड़ी एक प्रमुख मान्यता समुद्र मंथन की कथा से संबंधित है। कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया तब उसमें से हलाहल नामक भयंकर विष निकला। इस विष से पूरी सृष्टि को खतरा पैदा हो गया। तब भगवान शिव ने सभी की रक्षा के लिए विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। मान्यता है कि विष की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने शिवजी पर जल चढ़ाया तभी से जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई।
चार प्रहर पूजा का विशेष महत्व
सावन शिवरात्रि की रात (Sawan Shivratri 2026 Date) चार प्रहर में शिव पूजा करने की परंपरा मानी जाती है। भक्त रातभर जागकर शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करते हैं। इसके साथ ही बेलपत्र अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि शिवरात्रि की रात श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने वाले भक्तों को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
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