Shardiya Navratri 2026: अक्टूबर में किस तारीख से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्री? जान लें घटस्थापना का महा मुहूर्त और कलश स्थापना की सही विधि!

Shardiya Navratri 2026: वैसे तो साल में कई नवरात्रि आती हैं, लेकिन आश्विन महीने में आने वाली शारदीय नवरात्रि को मुख्य माना जाता है। इसमें पूरे नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है आइये जानते हैं कब से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्री..

Shardiya Navratri 2026: अक्टूबर में किस तारीख से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्री? जान लें घटस्थापना का महा मुहूर्त और कलश स्थापना की सही विधि!

Shardiya Navratri 2026/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

Modified Date: September 19, 2026 / 07:29 pm IST
Published Date: September 19, 2026 7:25 pm IST
HIGHLIGHTS
  • अक्टूबर 2026 शारदीय नवरात्रि कब है?
  • माँ दुर्गा का पृथ्वी लोक पर आगमन!
  • घटस्थापना के अमृत मुहूर्त!

Shardiya Navratri 2026हर वर्ष आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शारदीय नवरात्री का शुभारंभ होता है। वर्ष 2026 में, इस पावन पर्व की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) से हो रही है और इनका समापन 19 अक्टूबर को होगा। हालांकि, प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 09:19 बजे से ही लग जाएगी और 11 अक्टूबर की रात 09:30 बजे समाप्त होगी, लेकिन उदयातिथि के नियम के अनुसार घटस्थापना और प्रथम व्रत रविवार, 11 अक्टूबर को ही मान्य होगा।

हिन्दू धर्म में नवरात्रि के त्योहार का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। वैसे तो साल में कई नवरात्रि आती हैं, लेकिन आश्विन महीने में आने वाली शारदीय नवरात्रि को मुख्य माना जाता है। इसमें पूरे नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इन दिनों माँ दुर्गा पृथ्वी पर रहती हैं। जो भक्त सच्चे दिल से माँ की पूजा करते हैं, माँ उनके सारे दुख दूर कर देती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। आइये नज़र डालते हैं शारदीय नवरात्री के 9 दिवसीय कैलेंडर पर..

शारदीय नवरात्री 2026 का 9 दिवसीय कलैंडर!

11 अक्टूबर, 2026 प्रतिपदा तिथि (घटस्थापना) – माँ शैलपुत्री पूजा
12 अक्टूबर, 2026 द्वितीय तिथि – माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
13 अक्टूबर, 2026 तृतीय तिथि – माँ चंद्रघंटा पूजा
14 अक्टूबर, 2026 चतुर्थी तिथि – माँ कूष्मांडा पूजा
15 अक्टूबर, 2026 पंचमी तिथि – माँ स्कंदमाता पूजा
16 अक्टूबर, 2026 षष्ठी तिथि – माँ कात्यायनी पूजा
17 अक्टूबर, 2026 सप्तमी तिथि – माँ कालरात्रि पूजा
18 अक्टूबर, 2026 महाअष्टमी तिथि – माँ महागौरी पूजा
19 अक्टूबर, 2026 महानवमी तिथि – माँ सिद्धिदात्री पूजा

Shardiya Navratri 2026 date: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त!

11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 06:19 से 10:12 बजे तक रहेगा, जिसमें कलश स्थापना के लिए कुल 3 घंटे 52 मिनट का समय मिलेगा। इसके अतिरिक्त, आप दोपहर 11:44 बजे से लेकर दोपहर 12:31 बजे के बीच मिलने वाले शुभ ‘अभिजीत मुहूर्त’ में भी कलश स्थापना का पूजन संपन्न कर सकते हैं।

घटस्थापना एवं पूजन सामग्री की संपूर्ण सूची!

कलश स्थापना एवं नवरात्रि पूजन शुरू करने से पहले एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद घटस्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, साफ मिट्टी और जौ तैयार रखें। कलश के लिए तांबे या पीतल का पात्र, गंगाजल, मौली, रोली, अक्षत, सुपारी, सिक्का और आम या अशोक के पत्ते एकत्रित कर लें। अंत में पानी वाले नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश पर स्थापित करने के लिए रखें और साथ ही माता की श्रृंगार सामग्री, धूप-दीपक और भोग (फल-मिठाई) की व्यवस्था भी पूरी कर लें।

घटस्थापना की आसान विधि!

सबसे पहले मिट्टी के चौड़े बर्तन में साफ मिट्टी भरकर जौ (ज्वार) के बीज बोएं और थोड़ा पानी छिड़कें।
इसके बाद कलश पर मौली बांधकर स्वास्तिक बनाएं और उसमें जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत व हल्दी की गांठ डालें।
अब कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते सजाएं और लाल चुनरी में लिपटा हुआ नारियल उसके ऊपर रख दें।
अंत में इस कलश को जौ वाले पात्र के बिल्कुल बीच में रखते हुए माँ दुर्गा की चौकी के दाईं ओर स्थापित करें।

माँ दुर्गा का आह्वान और दैनिक पूजा विधि!

  • कलश स्थापना के बाद, सबसे पहले माँ के सामने घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
  • फिर माँ शैलपुत्री और अन्य देवताओं का ध्यान कर उन्हें फल-फूल, धूप-दीप और भोग लगाएं।
  • नवरात्रि में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का जाप करें।
  • अंत में माँ दुर्गा की आरती करके प्रसाद बांटें और नौ दिनों तक सुबह-शाम नियमित रूप से आरती अवश्य करें।

व्रत और उपवास के मुख्य नियम!

शारदीय नवरात्रि के व्रत में तन और मन की पवित्रता सबसे महत्वपूर्ण है। नौ दिनों का उपवास रखने वाले भक्तों को केवल सात्विक भोजन (जैसे कुट्टू का आटा, सेंधा नमक, फल, मेवे और दूध) का ही सेवन करना चाहिए। इस पावन समय के दौरान घर में प्याज, लहसुन, मांसाहार या किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का प्रवेश और उपयोग पूरी तरह वर्जित माना जाता है।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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लेखक के बारे में

Swati Shah, Since 2023, I have been working as an Executive Assistant at IBC24, No.1 News Channel in Madhya Pradesh & Chhattisgarh. I completed my B.Com in 2008 from Pandit Ravishankar Shukla University, Raipur (C.G). While working as an Executive Assistant, I enjoy posting videos in the digital department.