मप्र सरकार ने अधिकारियों को वित्तपोषित मदरसों में फर्जी नामांकन की जांच करने का आदेश दिया

मप्र सरकार ने अधिकारियों को वित्तपोषित मदरसों में फर्जी नामांकन की जांच करने का आदेश दिया

मप्र सरकार ने अधिकारियों को वित्तपोषित मदरसों में फर्जी नामांकन की जांच करने का आदेश दिया
Modified Date: August 17, 2024 / 04:28 pm IST
Published Date: August 17, 2024 4:28 pm IST

भोपाल, 17 अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश सरकार ने अधिकारियों को सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले मदरसों में नामांकित छात्रों को सत्यापित करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि माता-पिता या अभिभावकों की सहमति के बिना उन्हें धार्मिक शिक्षा न दी जाए।शनिवार को एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

राज्य सरकार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की सिफारिश पर आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि कुछ मदरसों ने छात्रों के नाम फर्जी तरीके से दर्ज किए हैं।

आदेश में कहा गया है कि एनसीपीसीआर, नई दिल्ली और समाचार पत्रों के संज्ञान में लाया गया है कि सरकारी अनुदान प्राप्त करने के लिए कई गैर-मुस्लिम बच्चों के नाम फर्जी तरीके से मदरसों में दर्ज किए गए हैं।

आयुक्त (लोक शिक्षण या सार्वजनिक निर्देश) शिल्पा गुप्ता ने आदेश जारी कर अधिकारियों को मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसों का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी अनुदान प्राप्त करने के लिए बच्चों (मुस्लिम या गैर-मुस्लिम) के नाम धोखाधड़ी से पंजीकृत नहीं किए गए हैं।

आदेश के अनुसार, यदि मदरसों में बच्चों के नाम धोखाधड़ी से पंजीकृत किए गए थे, तो उनका अनुदान रोक दिया जाएगा, मान्यता रद्द कर दी जाएगी और उचित दंड प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसमें संविधान के अनुच्छेद 28 (3) का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है, ‘राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त या राज्य निधि से सहायता प्राप्त करने वाले किसी भी शैक्षणिक संस्थान में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति को ऐसी संस्था में दी जाने वाली किसी भी धार्मिक शिक्षा में भाग लेने या ऐसी संस्था में या उससे जुड़े किसी परिसर में आयोजित किसी भी धार्मिक पूजा में भाग लेने की आवश्यकता नहीं होगी, जब तक कि ऐसा व्यक्ति या यदि ऐसा व्यक्ति नाबालिग है, तो उसके अभिभावक ने अपनी सहमति नहीं दी हो।’

आदेश में कहा गया है कि इस प्रावधान के मद्देनजर, यदि राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों या राज्य निधि से सहायता प्राप्त करने वाले बच्चों को उनके धर्म की शिक्षाओं के विपरीत धार्मिक शिक्षा दी जा रही है या उन्हें उनकी सहमति के बिना धार्मिक शिक्षा लेने या किसी पूजा में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है (यदि वे नाबालिग हैं, तो उनके अभिभावक), तो सभी अनुदानों को रोककर ऐसे मदरसों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जानी चाहिए और अन्य उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

राज्य जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि निर्देश निदेशक, सार्वजनिक निर्देश और मप्र मदरसा बोर्ड के सचिव को जारी किए गए हैं।

भाषा दिमो पवनेश रंजन

रंजन


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