भारत में 90 प्रतिशत सिंथेटिक ट्रैक घटिया गुणवत्ता के हैं, एएफआई प्रमाणन प्रक्रिया में शामिल होगा

भारत में 90 प्रतिशत सिंथेटिक ट्रैक घटिया गुणवत्ता के हैं, एएफआई प्रमाणन प्रक्रिया में शामिल होगा

भारत में 90 प्रतिशत सिंथेटिक ट्रैक घटिया गुणवत्ता के हैं, एएफआई प्रमाणन प्रक्रिया में शामिल होगा
Modified Date: April 18, 2026 / 06:56 pm IST
Published Date: April 18, 2026 6:56 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) भारत में एथलेटिक्स के बुनियादी ढांचे को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के प्रवक्ता आदिल सुमरिवाला ने कहा है कि देश में इस्तेमाल हो रहे लगभग 90 प्रतिशत सिंथेटिक ट्रैक मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

सुमरिवाला ने कहा कि यह समस्या केवल सामग्री की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया, मार्किंग और समग्र निर्माण मानकों में भी गंभीर खामियां हैं।

उन्होंने बताया कि विश्व एथलेटिक्स (डब्ल्यूए) ने इस मुद्दे पर एएफआई को सक्रिय भूमिका निभाने और स्थिति सुधारने के निर्देश दिए हैं।

सुमरिवाला ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मैं किसी ट्रैक का नाम नहीं लूंगा, लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि भारत में 90 प्रतिशत से अधिक ट्रैक सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और मार्किंग के लिहाज से मानकों से नीचे हैं। हमने तोक्यो में विश्व एथलेटिक्स के साथ एक बैठक की थी (पिछले वर्ष विश्व चैंपियनशिप के दौरान), जहां उन्होंने हमें कुछ आंकड़े दिखाए, जो काफी चौंकाने वाले थे।”

उन्होंने बताया, “कुछ मामलों में स्थिति बेहद खराब है, जहां असली पॉलीयुरेथेन की जगह पुराने टायरों के रबर का उपयोग किया जा रहा है और ऊपर से केवल रंग चढ़ा दिया जाता है। ऐसे ट्रैक कुछ महीनों में ही खराब हो जाते हैं और उन पर प्रदर्शन करना मुश्किल हो जाता है।”

सुमरिवाला ने कहा कि एएफआई ने 14 और 15 अप्रैल को कोहिमा में आयोजित अपनी वार्षिक आम बैठक के दौरान ट्रैक प्रमाणन प्रक्रिया में शामिल होने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि महासंघ अब प्रमाणित और विश्वसनीय विक्रेताओं की सूची तैयार करने पर भी काम करेगा और विदेशी विशेषज्ञों की मदद से अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में पहले से मौजूद विश्व एथलेटिक्स प्रमाणित ट्रैकों पर पुनः प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होगी।

इसी बीच, एएफआई ने हाल ही में खिलाड़ियों के प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) समझौतों पर लगाए गए प्रतिबंध को फिलहाल तीन महीने के लिए स्थगित कर दिया है, ताकि इस पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा सके।

सुमरिवाला ने कहा, “महासंघ का उद्देश्य खिलाड़ियों की सुरक्षा और हितों की रक्षा करना है, क्योंकि कई अनुबंधों में पारदर्शिता और सुरक्षा की कमी देखी गई है।”

भाषा आनन्द नमिता

नमिता


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