अंशु एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल में, मनीषा कांस्य पदक मुकाबले में उतरेगी

अंशु एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल में, मनीषा कांस्य पदक मुकाबले में उतरेगी

अंशु एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल में, मनीषा कांस्य पदक मुकाबले में उतरेगी
Modified Date: November 29, 2022 / 08:31 pm IST
Published Date: April 22, 2022 12:48 pm IST

उलानबटोर (मंगोलिया), 22 अप्रैल (भाषा) अंशु मलिक ने एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में शुक्रवार को यहां अपने तीनों मुकाबले तकनीकी श्रेष्ठता के दम पर जीतकर 57 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया जबकि मनीषा  62 किग्रा कांस्य पदक के लिए रिंग में उतरेंगी।

 हरियाणा के निदानी गांव की 20 साल की गत चैंपियन अंशु ने यहां हर मुकाबले में अपना दबदबा कायम  करते हुए एशियाई चैंपियनशिप में अपना तीसरा पदक पक्का किया।

अंशु ने 2020 में भारत में  कांस्य पदक जीतने के बाद और पिछले साल अल्माटी में 57 किग्रा का खिताब अपने नाम किया था।

पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं अंशु ने उज्बेकिस्तान की शोखिदा अखमेदोवा पर जीत के साथ शुरुआत की। उन्होंने इसके बाद सिंगापुर की डेनिएल सू चिंग लिम को पटखनी दी। चिंग के पास अंशु के दबदबे का कोई जवाब नहीं था।

अंशु ने अपने शानदार खेल से प्रतिद्वंद्वियों को सोचने या रणनीति बनाने का कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने सेमीफाइनल में मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखुउ की चुनौती को दो मिनट 12 सेकंड में खत्म कर दिया। अंशू ने ‘डबल लेग अटैक’ की मदद से चार अंक बनाने के बाद आसानी से ‘टेक-डाउन (पटखनी)’ और ‘पुश-आउट (खेल क्षेत्र से बाहर निकालना)’ अंक जुटाये।

पिछले कुछ समय से घरेलू स्पर्धाओं में 62 किग्रा वर्ग में अच्छा प्रदर्शन कर रही मनीषा को सेमीफाइनल में जापान की नोनोका ओजाकी से महज 40 सेकेंड में हार का सामना करना पड़ा, जिससे वह स्वर्ण पदक की दौड़ से बाहर हो गईं।

ओजाकी ने प्रतियोगिता की शुरुआत में ही उसे ‘लेग-लेस मूव (प्रतिद्वंद्वी के पैरों पर पकड़ बनाना)’ में फंसा दिया और एक झटके में मुकाबला समाप्त कर दिया।

मनीषा ने कजाकिस्तान की अयाउलीम कासिमोवा के खिलाफ 9-0 से जीत दर्ज करते हुए शानदार शुरुआत की थी।

वह कांस्य पदक के लिए कोरिया की हैनबिट ली से भिड़ेंगी।

इस बीच, स्वाति शिंदे (53 किग्रा) तकनीकी श्रेष्ठता से अपने दोनों मुकाबले हार गईं और पदक की दौड़ से बाहर हो गईं।

भाषा आनन्द पंत

पंत


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