(अमनप्रीत सिंह)
नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) उम्र को लेकर धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिये भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) से जन्मतिथि में बदलाव के तमाम रिकॉर्ड को स्थायी रूप से सहेजने का आग्रह किया है और खास और पूरी तरह से सत्यापित मामलों को छोड़कर काफी समय बीतने के बाद ऐसे बदलावों पर रोक लगाने के लिये भी कहा है ।
यूआईडीएआई सीईओ सौरभ गर्ग को 18 जून को लिखे पत्र में डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि महासंघ ने ऐसे कई मामले देखें हैं जिनमें पहलवान जन्मतिथि के रिकॉर्ड में बदलाव करके उम्र कम दिखाते हैं । हाल ही में उम्र के सत्यापन की मुहिम के तहत यह देखने में आया है ।
महासंघ ने कहा कि गोंडा में छह से आठ जून तक अंडर 17 राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट के जरिये यह मामला उभरा । डब्ल्यूएफआई ने अधिक उम्र के करीब 500 पहलवानों को अयोग्य करर दिया जबकि सत्यापन की प्रक्रिया के बीच कई रजिस्टर्ड खिलाड़ी भागीदारी के लिये आये ही नहीं ।
महासंघ ने आयुवर्ग टूर्नामेंटों में भागीदारी की योग्यता का आकलन करने के लिये जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों के साथ आधार से जुड़ा प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया है ।
डब्ल्यूएफआई ने पत्र में लिखा ,‘‘ अभियान के दौरान अधिकारियों ने यूआईडीएआई पोर्टल पर आधार अपडेट रिकॉर्ड का इतिहास भी खंगाला और पाया कि कई मामलों में जन्मतिथि में कथित तौर पर बदलाव किया गया है । कुछ मामलों में तो चार से पांच साल तक ।’’
महासंघ ने यह भी दावा किया कि जन्मतिथि में बदलाव करने वाले कुछ पहलवान अब आधार अपडेट इतिहास मिटाने या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं ।
इसलिये महासंघ ने यूआईडीएआई से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जन्मतिथि में बदलाव के रिकॉर्ड स्थायी तौर पर रखे जायें और सत्यापन के मकसद से उपलब्ध रहें ।
इस साल की शुरूआत में खेल मंत्रालय ने आयु में धोखाधड़ी के खिलाफ राष्ट्रीय कोड को अधिसूचित किया जिसमें सभी वर्गों में उम्र के सत्यापन के लिये कड़ी व्यवस्था तय की गई है ।
भाषा मोना सुधीर
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