अस्मिता और हर्ष के ऐतिहासिक स्वर्ण से भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

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अस्मिता और हर्ष के ऐतिहासिक स्वर्ण से भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

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  • Publish Date - August 1, 2026 / 12:02 AM IST,
    Updated On - August 1, 2026 / 12:02 AM IST

(अपराजिता उपाध्याय)

(फोटो सहित)

ग्लास्गो, 31 जुलाई (भाषा) भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने शुक्रवार को राष्ट्रमंडल खेलों में इतिहास रच दिया। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में भारत के लिए पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीते जबकि यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीतकर देश के सबसे सफल जूडो अभियान को पूरा किया।

भारत ने इस प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

इससे पहले भारतीय जूडो खिलाड़ी हर बार पदक जीतते रहे थे, लेकिन पीला तमगा हासिल नहीं कर सके ।

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।

त्रिपुरा की 23 वर्ष की अस्मिता शुरूआत में पिछड़ गई थी और उन्हें पेनल्टी भी लगी ।

उन्होंने हालांकि शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1 . 1 से हराकर किया । चार मिनट के मुकाबले में दोनों में से किसी को निर्णायक स्कोर नहीं मिल सका जिससे मुकाबला गोल्डन स्कोर में गया ।

इसमें पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है । अस्मिता ने सडन डैथ में आक्रामक प्रदर्शन करके जीत दर्ज की ।

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता ।

पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया ।

शुरूआती चरण में कोई भी खिलाड़ी हावी होता नहीं दिख रहा था लेकिन आखिरी 41 मिनट में हर्ष ने आक्रामक खेल दिखाया ।

जोशुआ ओशियाना चैम्पियनशिप और आस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में कई बार जीत चुके हैं । उन्होंने बर्मिघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य जीता था और वह ओलंपियन भी हैं ।

हर्ष ने कहा, ‘‘मेरी वजह से इतने बड़े मंच पर राष्ट्रगान बजना बहुत खास अहसास है। मैं यह पदक अपनी मां को समर्पित करता हूं। ’’

इन दोनों स्वर्ण पदकों ने भारतीय जूडो के लिए एक नया दौर शुरू किया और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक का 30 साल से अधिक पुराना इंतजार खत्म किया।

यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 की रजत पदक विजेता और अनुभवी खिलाड़ी 28 वर्ष की टॉपराक के खिलाफ यामिनी ने बराबरी का खेल दिखाया ।

शुरुआत से ही दोनों खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया जिससे मुकाबला बेहद कड़ा रहा और इसका फैसला गोल्डन स्कोर में हुआ।

टॉपराक ने यामिनी को जमीन पर गिराकर अंक हासिल करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने शानदार बचाव किया। टॉपराक के तेज हमलों से यामिनी पर दबाव बढ़ गया। इसी दौरान रेफरी ने यामिनी को एक पेनल्टी दे दी।

कोई भी खिलाड़ी अंक नहीं बना सकी जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंचा। अतिरिक्त समय में दोनों के बीच कड़ा संघर्ष जारी रहा। आखिरकार करीब तीन मिनट तक चले गोल्डन स्कोर मुकाबले में टॉपराक के लगातार हमलों के कारण यामिनी से गलती हुई। टॉपराक ने इप्पोन के जरिए जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल किया।

मध्यप्रदेश के सागर की रहने वाली यामिनी दो बार सीनियर राष्ट्रीय चैम्पियन रह चुकी हैं । उन्होंने 2022 से लगातार भारत के लिये खेला है और 2022 राष्ट्रीय खेल, 2025 हांगकांग एशियाई ओपन, 2026 डकार अफ्रीका ओपन में स्वर्ण पदक जीते ।

इससे पहले दिन में अस्मिता, हर्ष और यामिनी ने फाइनल में पहुंचकर भारत के लिए तीन पदक पक्के कर दिए थे।

अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को इप्पोन से हराया और फिर सेमीफाइनल में घरेलू खिलाड़ी समर शॉ को हराकर फाइनल में जगह बनाई।

हर्ष ने पहले मुकाबले में मलावी के चिकोंडी कथेवेरा को इप्पोन से हराया, फिर वानुअतु के खिलाड़ी को मात दी और सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो को हराकर फाइनल में पहुंचे।

यामिनी ने घाना की फ्रेमा अग्येई और दक्षिण अफ्रीका की डोन्ने ब्रेटेनबाख को हराकर फाइनल में जगह बनाई।

हालांकि भारत के श्रद्धा कदुबाल चोपड़े और रोहित बसीर मजगुल अपने-अपने रेपेचेज मुकाबले हारकर पदक की दौड़ से बाहर हो गए।

भाषा नमिता मोना

मोना