राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप के दौरान ‘हाई’ रहेगा बनारस का जोश : मोदी
राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप के दौरान ‘हाई’ रहेगा बनारस का जोश : मोदी
वाराणसी (उप्र), चार जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को विश्वास जताया कि राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप के दौरान बनारस का जोश ‘हाई’ रहेगा।
मोदी ने अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में आयोजित 72वीं सीनियर राष्ट्रीय वालीबॉल चैंपियनशिप का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा, ‘आज से काशी में राष्ट्रीय वालीबॉल चैंपियनशिप का शुभारंभ हो रहा है। आप सभी खिलाड़ी बहुत कड़ी मेहनत के बाद इस राष्ट्रीय टूर्नामेंट तक पहुंचे हैं। आपने जो मेहनत की है आने वाले दिनों में काशी के मैदान पर उसकी परीक्षा होगी। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘वैसे मुझे बताया गया है कि देश के 28 राज्यों की टीम यहां आई हैं। यानी आप सब एक भारत ‘श्रेष्ठ भारत’ की बहुत सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘मैं इस चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहे सभी खिलाड़ियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। साथियों आप बनारस आ गए हैं तो उसे जान भी जाएंगे। बनारस खेल प्रेमियों का शहर है। कुश्ती, कुश्ती के अखाड़े, मुक्केबाजी, नौका दौड़, कबड्डी…. ऐसे कई खेल यहां बहुत मशहूर हैं। बनारस में कई खेलों के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी दिए हैं।’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और काशी विद्यापीठ जैसे शिक्षण संस्थानों के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर छाए रहे हैं और काशी तो हजारों वर्षों से उन सभी का सत्कार करती आई है जो ज्ञान और कल की साधना के लिए यहां आते हैं। इसलिए मुझे विश्वास है कि राष्ट्रीय वालीबॉल चैंपियनशिप के दौरान बनारस का ‘जोश हाई’ हो जाएगा। आप सभी खिलाड़ियों को उत्साह बढ़ाने वाले दर्शक भी मिलेंगे और काशी की आतिथ्य परंपरा को जीने का अवसर भी मिलेगा।’
उन्होंने वालीबॉल में टीम भावना की जरूरत का जिक्र करते हुए कहा कि वालीबॉल कोई साधारण खेल नहीं है। नेट के इस पार और उस पार दोनों तरफ यह संतुलन का खेल है। यह सहयोग का खेल है और इस खेल में संकल्प शक्ति भी दिखती है। वालीबॉल हमें टीम भावना से जोड़ती है, वॉलीबॉल के हर खिलाड़ी का मंत्र होता है ‘टीम फर्स्ट’। हर कोई भले ही अलग-अलग क्षमताओं वाला हो लेकिन सभी खिलाड़ी अपनी टीम की जीत के लिए खेलते हैं
प्रधानमंत्री ने बताया कि वाराणसी ने कई महत्वपूर्ण आयोजनों की मेजबानी की है, जिनसे स्थानीय लोगों को मौके मिले हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है, जिनमें जी-20 बैठकें, काशी तमिल संगमम और काशी तेलुगु संगमम जैसे सांस्कृतिक उत्सव, प्रवासी भारतीय सम्मेलन, और शंघाई सहयोग संगठन की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में वाराणसी का नाम शामिल है।
वाराणसी में पड़ रही सर्दी और स्थानीय व्यंजनों की ओर इशारा करते हुए मोदी ने कहा, ‘अभी वाराणसी में काफी ठंड है, और इस मौसम में खाने की कई तरह की स्वादिष्ट चीजें मिलती हैं। अगर आपको मौका मिले, तो ‘मलाइयो’ (एक स्थानीय मीठी डिश) का स्वाद जरूर लें। साथ ही, बाबा विश्वनाथ मंदिर जाना और गंगा नदी में नाव की सवारी करना न भूलें।’
भाषा
सलीम रवि कांत नमिता
नमिता

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