वर्तमान की 21 अंक वाली प्रणाली अच्छी, प्रारूप में बदलाव पर सतर्कता बरतनी चाहिए: साइना

वर्तमान की 21 अंक वाली प्रणाली अच्छी, प्रारूप में बदलाव पर सतर्कता बरतनी चाहिए: साइना

वर्तमान की 21 अंक वाली प्रणाली अच्छी, प्रारूप में बदलाव पर सतर्कता बरतनी चाहिए: साइना
Modified Date: March 14, 2026 / 02:41 pm IST
Published Date: March 14, 2026 2:41 pm IST

(अमित कुमार दास)

नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने बैडमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) से स्कोरिंग में प्रस्तावित बदलाव पर सतर्कता बरतने का आग्रह किया है और उनका मानना है कि वर्तमान की 21 अंक की प्रणाली खेल की गति और दमखम बनाए रखती है।

बैडमिंटन की विश्व में सर्वोच्च संस्था बीडब्ल्यूएफ ने वर्तमान तीन गेम वाली 21 अंक की प्रणाली को तीन गेम की 15 अंक वाली प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव किया है। इस बदलाव पर सदस्य 25 अप्रैल को डेनमार्क के होर्सेंस में बीडब्ल्यूएफ की वार्षिक आम बैठक में मतदान करेंगे।

साइना ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘बैडमिंटन की परंपरा समृद्ध है तथा ऑल इंग्लैंड ओपन और बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप जैसे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों की गति और सहनशक्ति की परीक्षा होती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘स्कोरिंग या प्रारूप में किसी भी तरह के बदलाव पर सतर्कता पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। वर्तमान की 21 अंक वाली प्रणाली अच्छा काम कर रही है और खिलाड़ी इससे अच्छी तरह तालमेल बिठा चुके हैं।’’

साइना ने कहा, ‘‘यदि कुछ बदलाव किए भी जाते हैं तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रैलियों की गुणवत्ता और खेल के प्रतिस्पर्धी संतुलन पर कोई असर न पड़े। निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और खेल भावना पर ही ध्यान केंद्रित रहना चाहिए।’’

बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर के लिए प्रस्तावित नए प्रारूप के अनुसार एशिया और यूरोप में होने वाले पांच सुपर 1000 टूर्नामेंटों में एकल वर्ग में एक नया प्रारूप लागू किया जाएगा, जिसमें 48 खिलाड़ी ग्रुप चरण में प्रतिस्पर्धा करेंगे और उसके बाद नॉकआउट राउंड होंगे।

युगल स्पर्धाओं में 32 जोड़ियों के नॉकआउट ड्रॉ होंगे। प्रत्येक सुपर 1000 टूर्नामेंट 11 दिन तक चलेगा।

साइना का मानना ​​है कि बीडब्ल्यूएफ को खिलाड़ियों के कल्याण को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उनका मानना है कि व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर के कारण आराम के लिए बहुत कम समय बचता है और इससे खिलाड़ियों के चोटिल होने और उन पर थकान हावी होने की संभावना बनी रहती है।

उन्होंने कहा, ‘‘बैडमिंटन शारीरिक और मानसिक दोनों दृष्टि से मुश्किल खेल रहा है। इसमें लंबी रैलियां होती हैं और खिलाड़ी लगभग प्रत्येक सप्ताह टूर्नामेंट में खेलते हैं। बीडब्ल्यूएफ ने कैलेंडर को व्यवस्थित करने की कोशिश की है लेकिन एक खिलाड़ी के लिए रिकवरी का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। चोटें और थकान प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं और करियर को भी छोटा कर सकती हैं।’’

साइना ने लक्ष्य सेन की अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने के लिए सराहना की जो पिछले सप्ताह ऑल इंग्लैंड ओपन में पुरुष एकल में उपविजेता रहे थे। यह दूसरा मौका था जबकि लक्ष्य सेन इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘ऑल इंग्लैंड ओपन जैसी बड़ी प्रतियोगिता के फाइनल में दो बार जगह बनाना बड़ी उपलब्धि है। यह शुरू से बैडमिंटन का प्रमुख टूर्नामेंट रहा है और वहां प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा होता है।’’

साइना ने कहा, ‘‘इससे लक्ष्य के खेल में निरंतरता का पता चलता है। इससे यह भी पता चलता है कि वह सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। फाइनल तक पहुंचने का मतलब है कि कोई भी खिलाड़ी खिताब से अब ज्यादा दूर नहीं है।’’

हैदराबाद की यह 35 वर्षीय खिलाड़ी युवा भारतीय शटलरों के प्रदर्शन से भी प्रभावित हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि शारीरिक शक्ति, मैच के दौरान धैर्य और रणनीतिक जागरूकता निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

साइना ने कहा, ‘‘शीर्ष स्तर पर निरंतरता बनाए रखने के लिए कई वर्षों तक फिटनेस, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता बनाए रखना जरूरी होता है। खिलाड़ियों को पूरे सत्र में अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। युवा खिलाड़ियों को अपने दमखम, मैच को लेकर धैर्य और रणनीति बनाने में माहिर होना चाहिए।’’

भाषा

पंत नमिता

नमिता


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