ईएफआई ने बलात्कार के आरोपी सदस्य को जॉर्डन में कोच के रूप में भेजा
ईएफआई ने बलात्कार के आरोपी सदस्य को जॉर्डन में कोच के रूप में भेजा
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) बलात्कार के आरोपी कर्नल (सेवानिवृत्त) तरसेम सिंह वरैच को विदेशी दौरे के लिए नामित किए जाने से एक बार फिर भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) सवालों के घेरे में आ गई है।
खेल मंत्रालय ने इसी बीच अलग मामले में लंबे समय से चले आ रहे प्रशासनिक और नियमों के पालन में विफलताओं को लेकर ईएफआई को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
ईएफआई से जुड़ा नवीनतम विवाद उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें तरसेम सिंह को 29 से 31 जनवरी तक जॉर्डन में होने वाले ‘इंटरनेशनल टेंट पेगिंग फेडरेशन (आईटीपीएफ)’ विश्व कप क्वालीफायर के लिए भारतीय टीम का कोच-सह-मैनेजर बनाया गया है।
इस प्रतियोगिता की शीर्ष दो टीमें नवंबर में जॉर्डन में होने वाले फाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी।
ईएफआई की कार्यकारी समिति के सदस्य तरसेम ने कभी राष्ट्रीय टेंट पेगिंग चैंपियनशिप में भाग नहीं लिया है और इससे पहले उन्हें प्रतिरूपण (असली पहचान छिपाकर या झूठी पहचान बनाकर फायदा उठाना) से संबंधित एक मामले में महासंघ ने 2022-2024 तक निलंबित कर दिया था।
उनके चयन पर एक जूनियर राइडर के पिता ने आपत्ति जताई और इस संबंध में विश्व संस्था आईटीपीएफ को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने बताया कि सोनीपत में तरसेम सिंह वरैच के खिलाफ दो महिलाओं द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज है।
उन्होंने लिखा,“अपराध की गंभीरता और इस तथ्य को देखते हुए कि संबंधित व्यक्ति जमानत पर बाहर है, खेल अधिकारी उन्हें देश से बाहर जाने और देश का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति कैसे दे सकते हैं?”
इस पर आईटीपीएफ ने ईएफआई से “उचित कार्रवाई” करने को कहा है।
आईटीपीएफ के ईमेल में कहा गया,“हम अनुरोध करते हैं कि इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए और दी गई जानकारी की जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही प्रतियोगियों की सुरक्षा और खेल की गरिमा बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी जाए।”
सूत्रों के अनुसार आईटीपीएफ ने कुछ अन्य प्रतिभागियों की आपत्ति के बाद जॉर्डन स्पर्धा के साथ चल रहे जजों के कोर्स में भी तरसेम को शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
तरसेम और ईएफआई के अंतरिम अध्यक्ष जगत सिंह से संपर्क करने की कई कोशिशों का कोई जवाब नहीं मिला।
जॉर्डन प्रतियोगिता के लिए चयन प्रक्रिया उस समय विवादों में घिर गई जब ईएफआई जनवरी में हुई राष्ट्रीय टेंट पेगिंग चैंपियनशिप के बाद तय चयन ट्रायल आयोजित करने में विफल रही।
लगातार कई दिनों तक संभावित खिलाड़ियों की अलग-अलग और विरोधाभासी सूचियां जारी की गई, जिसके बाद चयन मानदंडों का पालन न होने को लेकर राइडरों ने आपत्ति जताई। इसके बाद ट्रायल रोक दिए गए और खिलाड़ियों को अपने घोड़ों के साथ शिविर छोड़ने को कहा गया।
ईएफआई ने 16 जनवरी को खराब मौसम का हवाला देते हुए आईटीपीएफ को सूचित किया कि भारतीय टीम क्वालीफायर में हिस्सा नहीं ले पाएगी। अंतरराष्ट्रीय संस्था ने इस अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि पुष्टि के बाद हटने पर जुर्माना लगेगा और इसके बाद पेनल्टी का बिल भी भेजा गया।
इसके एक दिन बाद ईएफआई ने चार खिलाड़ियों की संशोधित सूची तरसेम सिंह के नाम के साथ आईटीपीएफ को भेजी।
इसी बीच खेल मंत्रालय ने 28 जनवरी को ईएफआई को विस्तृत कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसमें राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 के तहत दी गई छूट की शर्तों का पालन न करने पर जवाब मांगा गया है।
मंत्रालय ने कहा कि नवंबर 2021 में दी गई छूट के तहत ईएफआई को खेल अवसंरचना विकसित करनी थी और कम से कम दो-तिहाई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य और जिला इकाइयों का गठन सुनिश्चित करना था।
ईएफआई ने चार साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अनुपालन की जानकारी मंत्रालय को नहीं दी।
नोटिस में अदालत की उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया, जिनमें ईएफआई द्वारा व्यक्तियों, क्लबों और भारतीय सेना की विभिन्न इकाइयों को सीधे सदस्यता देने की प्रथा पर सवाल उठाए गए थे। अदालतों ने इसे खेल को बढ़ावा देने की बजाय मतदान पर नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास बताया था।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि ईएफआई वार्षिक प्रतियोगिता कैलेंडर जारी करने, राष्ट्रीय चैंपियनशिप की समय पर सूचना देने, चयन नीतियां बनाने और प्रकाशित करने, बजट के उपयोग, कोच और सहयोगी स्टाफ के पैनल तथा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की ठोस योजना देने में विफल रही है।
मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इन कमियों से खिलाड़ियों को नुकसान हो रहा है और देश को शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है। इसके साथ ही कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय संस्था एफईआई ने मान्यता रद्दा करने को लेकर भी चेतावनी दी है।
ईएफआई को 15 दिनों के अंदर जवाब देने को कहा गया है। जवाब न मिलने की स्थिति में खेल संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें मान्यता वापस लेने पर भी विचार किया जा सकता है।
भाषा आनन्द मोना
मोना

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