(मोना पार्थसारथी)
एम्सटेलवीन, 25 अगस्त (भाषा) भारत की महिला हॉकी खिलाड़ियों ने महिला हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) को बचाने के लिए भावुक अपील करते हुए कहा कि इस टूर्नामेंट ने युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप में 1974 के बाद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के करीब है। इस टीम में 11 युवा खिलाड़ी शामिल हैं। भारत ने ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड के खिलाफ केवल एक मैच हारा है, जबकि अपने पहले मैच में ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन को 2-2 से ड्रॉ पर रोका था।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद भारत सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया। अब वह पांचवें और छठे स्थान के लिए खेलेगा, जो कि 52 वर्षों में विश्व कप में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा।
खिलाड़ियों का मानना है कि महिला हॉकी लीग उनकी प्रगति का प्रमुख कारण रहा है और उन्हें डर है कि इसके बंद होने से भारत की अगली पीढ़ी को नुकसान पहुंच सकता है।
ओडिशा वॉरियर्स को 2024-25 में पहला एचआईएल खिताब दिलाने वाली अनुभवी मिडफील्डर नेहा ने भाषा से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने भारत में लड़कियों को हॉकी स्टिक थामने के लिए प्रेरित करने की पूरी कोशिश की है। लोग अपने बच्चों को व्यक्तिगत खेल खेलते देखना पसंद करते हैं, लेकिन इससे उनकी उम्मीद बंधनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो वर्षों में महिला एचआईएल से हमें फायदा मिला है। जूनियर और सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इस स्तर की प्रतिस्पर्धा नहीं होती। महिला एचआईएल ने हमें बलजीत, साक्षी और रुतुजा जैसी खिलाड़ी दी हैं, जो इस विश्व कप टीम का हिस्सा हैं। उदीयमान खिलाड़ियों के लिए भी हमें इस लीग की सख्त जरूरत है। इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए।’’
यह अपील ऐसे समय में की गई है जब फिर से शुरू की गई महिला एचआईएल को गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत की कप्तान सलीमा टेटे ने भी कहा कि अच्छी ‘बेंच स्ट्रेंथ’ तैयार करने में लीग की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय टीम में कई ऐसी खिलाड़ी है जिन्होंने एचआईएल में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाई। इससे उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए चुने जाने का मौका मिलता है, जो उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।’’
सलीमा ने कहा, ‘‘यह तो हमारे लिए बस शुरुआत है और अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। इसके लिए एचआईएल बेहद जरूरी है ताकि हमारी प्रतिभाओं का दायरा बढ़े और लड़कियों को अंतरराष्ट्रीय हॉकी के दबाव को संभालने का अच्छा अनुभव मिल सके।’’
इस लीग में अच्छा प्रदर्शन करके भारतीय टीम में जगह बनाने वाली साक्षी राणा ने कहा कि अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेलने से उन्हें दबाव से उबरने में मदद मिली।
उन्होंने कहा, ‘‘एचआईएल ने मुझे आत्मविश्वास दिया है, जो इस टूर्नामेंट में बहुत उपयोगी साबित हुआ। यह दबाव को अच्छी तरह से झेलने से जुड़ा है। हमने विश्व कप की शीर्ष स्कोरर यिब्बी जानसेन जैसी कई अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेला है और उनसे बहुत कुछ सीखा है।’’
नवनीत कौर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने से युवा भारतीय खिलाड़ियों का डर और झिझक दूर हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछले दो साल से एचआईएल में खेल रहे हैं और इससे हमें आत्मविश्वास मिला है। हमने अंतरराष्ट्रीय हॉकी के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ खेला है और उनके साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने से डर और झिझक दूर हो गई।’’
नवनीत ने टीमों और कॉर्पोरेट घरानों से लीग का समर्थन करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने सुना है कि कुछ टीमें महिला हॉकी लीग से हट रही हैं, लेकिन ऐसे समय में जब हमारा प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है, हम उनसे समर्थन बनाए रखने का अनुरोध करते हैं। महिला हॉकी लीग बंद होना महिला हॉकी और भावी खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा झटका होगा।’’
भारतीय खिलाड़ियों के लिए महिला लीग महज एक व्यावसायिक उद्यम नहीं बल्कि अगली पीढ़ी के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इशिका, साक्षी, शिल्पी डबास और लालथनलुआंगी जैसी खिलाड़ी एचआईएल में अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर विश्व कप टीम में शामिल हुई हैं।
नवनीत ने कहा, ‘‘मैं खेल मंत्रालय और हॉकी इंडिया से इस लीग को बचाने का अनुरोध कर रही हूं। मैं कॉर्पोरेट जगत से भी महिला हॉकी का समर्थन करने का अनुरोध करती हूं। हमारी लीग को इतने पैसों की जरूरत नहीं है। बात पैसों की नहीं है, हमें पहचान की जरूरत है। महिला हॉकी लीग को बने रहना चाहिए।’’
महिला हॉकी लीग के पहले सत्र में चार टीमें शामिल थीं – दिल्ली एसजी पाइपर्स, जेएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब, श्रची राढ़ बंगाल टाइगर्स और ओडिशा वॉरियर्स। खिलाड़ियों के बकाया और फ्रेंचाइजी शुल्क का भुगतान न करने के कारण ओडिशा वॉरियर्स को बाद में भंग कर दिया गया, जबकि दूसरे सत्र में रांची रॉयल्स ने उसकी जगह ली।
बाद में रांची फ्रेंचाइजी को भी बर्खास्त कर दिया गया है और भारतीय खिलाड़ी अभी भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले सत्र की फाइनलिस्ट श्रची राढ़ बंगाल टाइगर्स भी वित्तीय दबाव का हवाला देते हुए टूर्नामेंट से हटने पर विचार कर रही है।
फ्रैंचाइजी सूत्रों के अनुसार, लीग फिलहाल व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं है। पुरुष और महिला दोनों एचआईएल टीमों को चलाने की अनुमानित लागत लगभग 10-12 करोड़ रुपये है, जिसमें लगभग एक करोड़ रुपये का प्रशासनिक शुल्क भी शामिल है। हालांकि, महिला टीम के लिए तीसरे सत्र से 2.5 करोड़ रुपये का फ्रैंचाइज़ी शुल्क हटा दिया गया है।
भाषा मोना पंत सुधीर
सुधीर