आईओसी और फीफा से प्रेरित, लेकिन क्रिकेट के लिए पूरी तरह विशिष्ट: डॉ. इंगे

आईओसी और फीफा से प्रेरित, लेकिन क्रिकेट के लिए पूरी तरह विशिष्ट: डॉ. इंगे

आईओसी और फीफा से प्रेरित, लेकिन क्रिकेट के लिए पूरी तरह विशिष्ट: डॉ. इंगे
Modified Date: June 23, 2026 / 04:15 pm IST
Published Date: June 23, 2026 4:15 pm IST

…पूनम मेहरा …

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा जारी पहली ‘पोस्ट-प्रेग्नेंसी रिटर्न टू प्ले’ (मातृत्व के बाद खेल में वापसी) दिशा-निर्देश अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) और फीफा के मौजूदा दिशा-निर्देश पर आधारित हैं लेकिन इनमें क्रिकेट से जुड़ी विशेष शारीरिक, मानसिक और व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अलग दृष्टिकोण अपनाया गया है। यह बात आईसीसी की चिकित्सा सलाह समिति की सदस्य और इस दस्तावेज का मसौदा तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाली डॉ. फिलिपा इंगे ने कही। मेलबर्न स्थित खेल एवं व्यायाम चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. इंगे ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि इन दिशा-निर्देशों को तैयार करने की प्रक्रिया इनके संभावित प्रभाव और महिला क्रिकेटरों द्वारा सामने रखी गई चुनौतियों पर आधारित हैं। डॉ. इंगे ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की चिकित्सक भी हैं और इस समय इंग्लैंड में चल रहे आईसीसी महिला टी20 विश्व कप के दौरान टीम के साथ मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आईओसी ने कुछ दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। फीफा सहित अन्य संस्थाओं ने भी इस विषय पर पहले से व्यापक दिशा-निर्देश बनाए हैं। हमने उन दस्तावेज़ों का अध्ययन कर उन्हें आधार बनाया, लेकिन हमारी कोशिश थी कि क्रिकेट से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों और जरूरतों को भी इसमें शामिल किया जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने इसमें जो खास बात जोड़ने की कोशिश की है, वह है व्यावहारिक नजरिए को अपनाना, जो क्रिकेट से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों को दर्शाता है। उस समय अभ्यास कैसा होता है? किस तरह के कौशल को कब शामिल करने की जरूरत होती है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने कोई नया पहलू नहीं बनाया है। विभिन्न खेल संगठनों और देशों के उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए एक ऐसा व्यावहारिक ढांचा तैयार किया है, जिसे खिलाड़ी और टीम आसानी से अपना सकें।’’ महिला क्रिकेटरों के लिए सोमवार को जारी ‘रिटर्न टू प्ले पोस्ट-प्रेग्नेंसी गाइडलाइंस’ में छह ‘आर’ का ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें रेडी (तैयार), रिव्यू (समीक्षा), रेस्टोर (बहाली), रिकंडीशन (पुनः तैयारी), रिटर्न (वापसी) और रिफाइन (परिष्करण) शामिल हैं। यह दिशा-निर्देश फीफा की नीति की तरह है जिसमें खिलाड़ियों के साथ प्रबंधकों (मैनेजरों) को भी शामिल किया गया है। आईओसी ने इस विषय पर अलग नीति जारी नहीं की है, लेकिन उसने चिकित्सकीय मंजूरी से जुड़े मानकों पर एक सहमति-पत्र जारी किया था, जो दुनिया भर में मातृत्व के बाद खेल में वापसी संबंधी नीतियों का आधार बना हुआ है। डॉ. इंगे ने कहा कि सदस्य देशों की मांग के बाद आईसीसी ने इस विषय पर काम शुरू किया और दिशा-निर्देश तैयार करने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। उन्होंने कहा, ‘‘करीब एक साल पहले हमने इसका शुरुआती मसौदा तैयार किया था। इसके बाद सभी सदस्य देशों की चिकित्सा टीमों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं ली गईं। यह कोई कठोर नियम नहीं, बल्कि एक ऐसा ढांचा है, जिसे प्रत्येक देश अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपना सकता है।’’ मातृत्व के बाद खेल में वापसी करने वाली प्रमुख क्रिकेटरों में पाकिस्तान की पूर्व कप्तान बिस्माह माहरूफ का नाम शामिल है। उन्होंने हालांकि 2024 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। वेस्टइंडीज की एफी फ्लेचर 2021 में बेटे को जन्म देने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रही हैं। डॉ. इंगे के अनुसार खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शारीरिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और मानसिक होती है। उन्होंने कहा, ‘‘कई खिलाड़ियों ने पूछा कि यदि वे स्तनपान कराना चाहती हैं, तो मैच और प्रशिक्षण के दौरान यह कैसे संभव होगा? उनकी अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता कैसे पूरी होगी? खानपान कैसा होना चाहिए? यात्राओं का प्रबंधन कैसे होगा? ऐसे कई सवाल सामने आए।’’ उनका मानना है कि अधिकांश खिलाड़ी मातृत्व के बाद भी अपना करियर जारी रखना चाहती हैं, लेकिन इसके लिए संस्थागत समर्थन और स्पष्ट प्रक्रिया का होना जरूरी है। डॉ. इंगे ने माना कि हर देश के पास इन दिशा-निर्देशों को पूरी तरह लागू करने के लिए आवश्यक संसाधन नहीं होंगे। अलग-अलग मामलों के लिए ‘केयर मैनेजर’ नियुक्त करना भी अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी हो सकता है। उन्होंने कहा कि ये दिशा-निर्देश इतने लचीले हैं कि हर कोई इनसे लाभ उठा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य उद्देश्य सख्त सलाह देना नहीं था। यह एक ऐसा सुझाव है, जिसका उपयोग खिलाड़ी तथा उनकी चिकित्सा और ‘कंडीशनिंग’ टीम अपने-अपने माहौल के अनुसार कर सकती है और उसमें आवश्यक बदलाव भी कर सकती है।’’ डॉ. इंगे ने कहा कि प्रसव के बाद खिलाड़ी के लिए दोबारा उसी स्तर पर पहुंचने का आत्मविश्वास जुटाना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘‘कई बार वापसी का रास्ता बहुत लंबा महसूस होता है। अपने शरीर पर दोबारा भरोसा करना और शीर्ष स्तर का प्रदर्शन हासिल करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में खेल मनोवैज्ञानिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लक्ष्य केवल खिलाड़ी को मैदान पर वापस लाना नहीं, बल्कि उसे फिर से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के स्तर तक पहुंचाना होना चाहिए।’’ डॉ. इंगे को उम्मीद है कि आने वाले आठ से दस वर्षों में इन दिशा-निर्देशों का सकारात्मक असर दिखाई देगा और मातृत्व के कारण खेल छोड़ने वाली खिलाड़ियों की संख्या में कमी आएगी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं चाहती हूं कि 16, 18 या 35 वर्ष की कोई भी महिला खिलाड़ी यह महसूस करे कि वह क्रिकेट जारी रखते हुए परिवार भी बना सकती है। दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वास्तविक बदलाव देखने में शायद आठ से दस साल लगें। फिलहाल यह एक ऐसी पहल है, जिसके परिणामों पर भविष्य में नजर रखनी होगी।’’ भाषा आनन्द सुधीरसुधीर


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